इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने 10 अक्टूबर, 2026 को Meta को एक एडवाइजरी जारी की है। इस निर्देश में कंपनी को अपने रिकमेंडेशन एल्गोरिदम में विविधता लाने की जरूरत बताई गई है।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य सीमित विमर्श या नैरेटिव को जरूरत से ज्यादा बढ़ावा मिलने से रोकना है। मंत्रालय चाहता है कि ऐसे कंटेंट के खिलाफ सुरक्षा बढ़ाएं जिससे सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने का खतरा हो।
अधिकारियों ने यह कार्रवाई वर्तमान सार्वजनिक आयोजनों और चुनावी प्रक्रियाओं के बीच की है। इन स्थितियों की वजह से डिजिटल चर्चाओं को लेकर संवेदनशीलता काफी बढ़ गई है। यह सरकारी आदेश IT रूल्स, 2021 में तय किए गए ड्यू डिलिजेंस दायित्वों के तहत लागू किया गया है। इंडिया टुडे, द टाइम्स ऑफ इंडिया, NDTV प्रॉफिट और स्टोरीबोर्ड18 जैसे कई मीडिया आउटलेट्स ने इस औपचारिक निर्देश की पुष्टि की है।
एल्गोरिदम की निगरानी और कंटेंट की स्पष्टता
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि Meta को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके रिकमेंडेशन सिस्टम यूजर्स को केवल एक सीमित नजरिए या नैरेटिव तक सीमित न रखें। प्लेटफॉर्म से उम्मीद की गई है कि वह यूजर्स को विश्वसनीय जानकारी की विविधता प्रदान करे। PTI द्वारा समीक्षा किए गए दस्तावेजों में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है।
मंत्रालय ने कंपनी से यह भी मांग की है कि वह उन पोस्ट्स की पहचान और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया को तेज करे जिन्हें बहुत ज्यादा रीच मिल रही है। यह निर्देश खासकर उन पोस्ट्स के लिए है जिनमें भ्रम फैलाने या हिंसा भड़काने की क्षमता हो। टेक दिग्गज के लिए इन नए नियमों में स्पष्टता एक मुख्य आधार है।
जब यूजर्स के सामने किसी सार्वजनिक घटना से जुड़े फोटो, वीडियो या ग्राफिक्स आते हैं, जिनकी प्रामाणिकता या लोकेशन स्पष्ट नहीं होती, तो प्लेटफॉर्म को पर्याप्त संदर्भ (कॉन्टेक्स्ट) देना होगा। Meta को अपने रैंकिंग सिस्टम की समीक्षा करने के लिए कहा गया है ताकि मैनिपुलेटेड या भ्रामक कंटेंट एल्गोरिदम बूस्टिंग के जरिए व्यापक रूप से न फैलें।
नियमों का पालन और डिजिटल अधिकारों पर प्रभाव
यह एडवाइजरी मंत्रालय और सोशल मीडिया मध्यस्थों के बीच पहले हुई बातचीत का हिस्सा है। Meta को इन बदलावों को तुरंत लागू करने और अपनी प्रगति के बारे में मंत्रालय को नियमित अपडेट देने के लिए कहा गया है। कंपनी के लिए यह एक कठिन परीक्षा है क्योंकि उसे IT एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाले सेफ हार्बर प्रोटेक्शन और वर्तमान नियमों के अनिवार्य ड्यू डिलिजेंस मानकों के बीच संतुलन बनाना है।
डिजिटल अधिकार समूहों ने इस मामले में चिंता जताई है। उनका मानना है कि इस तरह के नियामक हस्तक्षेप से अनजाने में अभिव्यक्ति की आजादी या फ्री स्पीच दब सकती है। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि ये निर्देश केवल मौजूदा कानूनी ढांचे का पालन कराने के लिए हैं और यह सेंसरशिप की कोई कोशिश नहीं है।
फिलहाल स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है और लोग यह देख रहे हैं कि क्या यह हस्तक्षेप अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक भी बढ़ाया जाएगा। भविष्य में सरकार और Meta के बीच और बातचीत की संभावना है, क्योंकि अधिकारियों ने पहले भी पॉलिसी विसंगतियों को दूर करने के लिए समन जारी किए हैं।
20 अक्टूबर, 2026 तक इन निर्देशों के खिलाफ किसी औपचारिक कानूनी चुनौती की संभावना और यूजर एंगेजमेंट मेट्रिक्स पर पड़ने वाले असर जैसे मुद्दे अभी अनसुलझे हैं। मंत्रालय संवेदनशील समय के दौरान डिजिटल परिदृश्य की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए प्लेटफॉर्म की गतिविधियों की निगरानी जारी रखेगा।

























