प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की चार सदस्यों की एक टीम मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को रामपुर जिला जेल पहुंची। इस टीम ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता Azam Khan और उनके बेटे Abdullah Azam Khan से पूछताछ की।
यह पूरी कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में की गई है। अधिकारियों द्वारा सरकारी ठेकों और दान के जरिए आने वाले पैसों को गलत तरीके से मोड़ने की जांच की जा रही है।
जेल में बंद हैं आजम और अब्दुल्ला
Azam Khan और Abdullah Azam Khan फिलहाल पैन कार्ड डुप्लीकेशन मामले में सजा मिलने के बाद 10 साल की जेल की सजा काट रहे हैं। इसी कारण ED की टीम ने उनसे पूछताछ के लिए जेल का रुख किया।
Abdullah Azam Khan को पहले 5 दिसंबर 2025 को पासपोर्ट धोखाधड़ी के एक मामले में सात साल की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, 29 मई 2026 को रामपुर सेशन कोर्ट ने इस फैसले को रद्द कर दिया था।
कोर्ट से राहत मिलने के बावजूद वह अभी भी जेल में ही हैं क्योंकि उन पर अन्य कानूनी मामले लंबित हैं। सरकार इस मामले को हाई कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में है।
ED की जांच और छापेमारी का विवरण
ED की यह कार्रवाई सिलसिलेवार जांच का हिस्सा है। इससे पहले 19 अगस्त 2026 को रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली की 10 अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की गई थी।
इस मामले में एजेंसी ने अब तक कई लोगों से पूछताछ की है, जिनमें शामिल हैं:
- समाजवादी पार्टी के विधायक और जौहर ट्रस्ट के संयुक्त सचिव Naseer Ahmed Khan
- जौहर यूनिवर्सिटी के कुलपति Zahiruddin
- Azam Khan के चार्टर्ड अकाउंटेंट Deepak Goyal
- ठेकेदार Salim
जांच का मुख्य उद्देश्य ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों और दान के स्रोतों की सत्यता की जांच करना है।
मंत्री जयवीर सिंह का बयान
उत्तर प्रदेश के मंत्री Jaiveer Singh ने इस पूरी प्रक्रिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ED अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों को निभा रहा है।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह पूरी जांच स्वतंत्र है और इसमें किसी भी तरह के राजनीतिक विचारों या उद्देश्यों का कोई प्रभाव नहीं है।































