10 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्या कांत से औपचारिक अपील की है। एसोसिएशन ने यह मांग की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें क्योंकि दिल्ली पुलिस ने कई वकीलों को हिरासत में लिया है।
इन वकीलों में वरिष्ठ अधिवक्ता और महिला वकील भी शामिल थीं। ये सभी लोग सुप्रीम कोर्ट परिसर के पास एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, जिसके दौरान उन्हें पुलिस ने पकड़ा।
इस प्रदर्शन का आयोजन चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के विरोध में किया गया था। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
पुलिस कार्रवाई और SCBA का प्रस्ताव
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने एक प्रस्ताव पारित किया है जिसमें पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए गए ‘अत्यधिक बल’ की कड़ी निंदा की गई है। एसोसिएशन ने उल्लेख किया कि सुप्रीम कोर्ट के पास से हिरासत में लिए गए लोगों में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड सुमिता हजारीका भी शामिल थीं।
एसोसिएशन ने CJI से अनुरोध किया है कि वे हिरासत में लिए गए वकीलों की सुरक्षा और उनके ठिकाने का पता लगाएं। उन्होंने यह भी मांग की कि इन वकीलों को कानूनी प्रतिनिधित्व मिले और उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। इसके अलावा, SCBA ने पुलिस कार्रवाई की परिस्थितियों की औपचारिक जांच कराने का आग्रह किया है।
राजधानी में सुरक्षा और प्रतिबंध
ये गिरफ्तारियां राजधानी में सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच हुई हैं। यह स्थिति कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा दिए गए ‘दिल्ली चलो’ के आह्वान के बाद बनी थी। दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के सख्त प्रोटोकॉल लागू किए थे, जिसके कारण यातायात और सेवाएं प्रभावित हुईं।
सुरक्षा इंतजामों की वजह से 150 से अधिक ट्रेनों को रद्द या पुनर्निर्धारित करना पड़ा। साथ ही, दिल्ली मेट्रो के 45 स्टेशनों को बंद कर दिया गया। इंटरनेट सेवाओं पर भी पाबंदी लगाई गई थी।
जनपथ-कर्तव्य पथ क्रॉसिंग के 4 किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 9 अक्टूबर रात 10 बजे से 10 अक्टूबर रात 10 बजे तक निलंबित रहीं। इससे पहले CJP के संस्थापकों अभिजीत डिपके, आशुतोष रंका और सौरभ दास को दिल्ली पहुँचते ही रोक लिया गया था और हिरासत में ले लिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्या कांत की अध्यक्षता वाली एक बेंच वर्तमान में चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। यह मामला मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल और उनकी कार्यप्रणाली से संबंधित है।
5 अक्टूबर को अदालत ने स्पष्ट किया था कि वह केवल मीडिया रिपोर्टों के आधार पर CEC को निलंबित करने का अंतरिम आदेश जारी नहीं करेगी। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि संवैधानिक अधिकारियों से कानून के दायरे में काम करने की उम्मीद की जाती है। अदालत ने यह अधिकार सुरक्षित रखा है कि यदि कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया, तो वह फैसलों को पलट सकती है।









