अमेठी के भवलपुर, कटरा, पोस्ट भदर में एक धार्मिक कथा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में आचार्य त्रिवेणी चंद्र जी महाराज ने कथा सुनाई, जो विशेष रूप से श्रीधाम अयोध्या से यहाँ पहुंचे थे।
कथा के दूसरे दिन आचार्य ने कई धार्मिक प्रसंगों का वर्णन किया। इसमें राजा परीक्षित और शुकदेव के बीच हुए संवाद के साथ-साथ शुकदेव के जन्म की कहानी सुनाई गई।
राजा परीक्षित को मिला श्राप
आचार्य ने बताया कि राजा परीक्षित जंगल में प्यास लगने पर गहरे ध्यान में लीन ऋषि शमी से मिले। जब राजा के अनुरोध पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो उन्होंने अपमानित महसूस किया और ऋषि के गले में एक मृत सांप डाल दिया।
पास खेल रहे बच्चों ने इस घटना की जानकारी ऋषि के पुत्र को दी, जिसके बाद पुत्र ने राजा को श्राप दिया। उसने भविष्यवाणी की कि राजा की मृत्यु सातवें दिन तक्षक सर्प के द्वारा होगी। घटना की जानकारी मिलने पर ऋषि शमी ने दिव्य दृष्टि से जाना कि राजा ने यह कार्य कलियुग के प्रभाव में आकर किया था।
श्राप सुनने के बाद राजा परीक्षित ने अपना राज्य अपने पुत्र जनमेजय को सौंप दिया और गंगा तट की ओर प्रस्थान किया। वहां उनके साथ ऋषि-मुनि और देवता शामिल हुए, जिसके बाद व्यास पुत्र शुकदेव का आगमन हुआ और सभी ने उनका स्वागत किया।
भक्ति संगीत और आयोजन
इस कार्यक्रम में धार्मिक संगीत और भक्ति गीतों की प्रस्तुति रही, जिसे सुनने के लिए बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु जुटे।
- मुख्य मेजबान: कृष्ण एंटरप्राइजेज अमेठी के प्रोप्राइटर अयोध्या प्रसाद सिंह और उनकी पत्नी स्वर्गीय निर्मला सिंह।
- सह-मेजबान: शिक्षिका रचना सिंह और मनोज कुमार सिंह।









