एक मॉक पार्लियामेंट सत्र के दौरान, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग चुनावी प्रक्रिया के नाम पर सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर नागरिकों को उनके वोट देने के अधिकार से वंचित कर रहा है।
यह विरोध प्रदर्शन मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर है। कार्यकर्ताओं का दावा है कि इस प्रक्रिया के जरिए मनमाने ढंग से लगभग 13 करोड़ मतदाताओं को बाहर कर दिया गया है। आलोचकों का तर्क है कि SIR में इस्तेमाल होने वाले एल्गोरिदम और दस्तावेजों की शर्तों का उपयोग गरीब, वंचित और प्रवासी आबादी को मताधिकार से दूर करने के लिए किया जा रहा है।
INDIA गठबंधन की रैली और मांगें
युवा आंदोलन की प्रमुख चेहरा नेहा बोरा ने 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली INDIA गठबंधन की मेगा रैली का समर्थन किया है। 29 अक्टूबर 2026 को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बोरा ने गठबंधन की मुख्य मांगें दोहराईं:
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का तुरंत इस्तीफा।
- वर्तमान SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक।
- 2023 से लागू किए गए सभी चुनावी कानूनों और नियमों को वापस लेना।
इस आंदोलन में युवाओं के नेतृत्व वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) भी शामिल है, जिसने राहुल गांधी के नेतृत्व वाली भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी सहित INDIA गठबंधन के साथ हाथ मिलाया है।
भाजपा और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया
इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन दावों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची का संशोधन एक मानक और आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया है। वहीं, भारत निर्वाचन आयोग ने अपनी बात दोहराई है कि सटीक मतदाता सूची बनाए रखने के लिए यह संशोधन जरूरी है और आयोग ने किसी भी तरह के पक्षपात से इनकार किया है।









