बाराबंकी के रामनगर तहसील के तराई क्षेत्र में चक्रवात अर्नव के कारण हुई भारी बारिश से धान की खड़ी फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा है। चार दिनों तक चली शुरुआती बारिश के बाद 28 अक्टूबर से 31 अक्टूबर के बीच हुई मूसलाधार बारिश ने बची हुई फसलों को खेतों में डुबो दिया, जिससे वे सड़ने लगी हैं।
लोहाटी जय गांव के किसान श्याम मोहन ने बताया कि उन्होंने 20 बीघा धान की खेती के लिए अपनी पत्नी के झुमके 40,000 रुपये में गिरवी रखे थे। उनका कहना है कि अब पूरी फसल बर्बाद हो गई है, जिससे वे कर्ज चुकाने में असमर्थ हैं और सरकारी आर्थिक मदद के लिए बेताब हैं।
अन्य स्थानीय किसानों ने भी ऐसी ही स्थिति बताई है। रामदयाल मिश्रा ने कहा कि उनके 10 बीघा की फसल खेत में सड़ रही है, जबकि झेंगई रावत ने बताया कि उन्होंने 10 बीघा खेती की थी लेकिन एक दाना भी नहीं काट पाए हैं।
सर्वे और मुआवजे की प्रक्रिया पर आक्रोश
किसानों ने सर्वे और मुआवजे की प्रक्रिया पर गहरा गुस्सा जताया है। उनका आरोप है कि तहसील प्रशासन के अधिकारियों ने नुकसान का मौके पर जाकर आकलन नहीं किया है। किसानों का दावा है कि लेखपालों ने उन्हें मुआवजे के आवेदन के लिए ऑनलाइन पोर्टल बंद होने की जानकारी दी है।
आवेदन प्रक्रिया में तकनीकी दिक्कतों के कारण सरकारी मदद से वंचित रह जाने के डर से कई किसान व्यक्तिगत रूप से तहसील कार्यालय जा रहे हैं। वहां वे अपनी खतौनी, आधार कार्ड और बैंक पासबुक जमा कर रहे हैं।
रामशंकर त्रिवेदी, आनंद शुक्ला, सरजुदेई, Ramprakash, आनंद, अवधेश अवस्थी, श्याम मोहन त्रिवेदी, सुभाष त्रिवेदी, सुरेश शुक्ला, कुलदीप गुप्ता और देव कुमार समेत सैकड़ों किसानों ने निम्नलिखित मांगें की हैं:
- निष्पक्ष सर्वे कराया जाए।
- मुआवजे की राशि बढ़ाई जाए।
- पोर्टल को दोबारा खोला जाए ताकि सभी पात्र किसानों को सहायता मिल सके।
रामनगर तहसीलदार विपुल सिंह ने आश्वासन दिया है कि नुकसान की पूरी जांच के लिए अधिकारियों को भेजा जाएगा।









