झारखंड के रामगढ़ जिले की रहने वाली कविता कुमारी (महतो) ने होम गार्ड भर्ती के फिजिकल ट्रायल के दौरान अपने शानदार प्रदर्शन से सबका ध्यान खींचा है। उन्होंने अपनी बेहद कठिन व्यक्तिगत परिस्थितियों के बावजूद दौड़ पूरी की।
कविता कुमारी ने 1600 मीटर की दौड़ को मात्र छह मिनट में पूरा किया। खास बात यह है कि इस दौड़ के दौरान उन्होंने किसी जूते का इस्तेमाल नहीं किया और वह नंगे पैर दौड़ीं।
दौड़ के समय कविता ने ट्रैक सूट जैसे पेशेवर कपड़ों के बजाय एक फटी हुई साड़ी पहनी हुई थी। उनकी इस उपलब्धि की अब चारों तरफ चर्चा हो रही है।
पारिवारिक जिम्मेदारियां और कठिन संघर्ष
कविता कुमारी का जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा है। तीन साल पहले उन्होंने अपने पति को खो दिया था, जिसके बाद उन पर परिवार की पूरी जिम्मेदारी आ गई।
वह वर्तमान में अपने दो बच्चों और बुजुर्ग सास-ससुर का पालन-पोषण कर रही हैं। इस परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए वह एक ईंट भट्ठे पर काम करती हैं।
सीमित संसाधनों में की कड़ी तैयारी
आर्थिक तंगी के कारण कविता के पास पेशेवर एथलेटिक गियर खरीदने के पैसे नहीं थे। उनके पास न तो दौड़ने वाले जूते थे और न ही ट्रैक सूट।
इतनी कमी होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपने रोजमर्रा के कपड़ों में ही अभ्यास किया। वह अपनी ट्रेनिंग के लिए अक्सर सुबह 4:00 बजे उठकर तैयारी शुरू कर देती थीं।
नारी शक्ति और संकल्प की मिसाल
मैदान पर अपने कई साथियों से बेहतर प्रदर्शन करने की उनकी क्षमता की काफी प्रशंसा की जा रही है। इसे ‘नारी शक्ति’ के एक बड़े प्रमाण के रूप में देखा जा रहा है।
कविता कुमारी ने अपने अनुभव और नजरिए के बारे में कहा, ‘हालात कोई बहाना नहीं होते, बल्कि इतिहास रचने का एक जरिया होते हैं।’
- उनका यह प्रदर्शन नई पीढ़ी के लिए दृढ़ संकल्प का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है।
- यह साबित करता है कि कठिन परिस्थितियों को मजबूत इरादों से जीता जा सकता है।
उनकी यह सफलता दिखाती है कि उपलब्धि संसाधनों के होने से नहीं, बल्कि व्यक्ति के अपने व्यक्तिगत संकल्प से तय होती है।

























