दिल्ली पुलिस ने कानून और व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर होने वाले एक राजनीतिक और छात्र विरोध प्रदर्शन की आधिकारिक तौर पर अनुमति देने से इनकार कर दिया है। यह प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित किया जा रहा था।
इस आयोजन का नेतृत्व पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और सह-संयोजक सौरव दास कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का मुख्य उद्देश्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करना और मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) में हुई कथित गड़बड़ियों का विरोध करना है।
CJP को कई छात्र संगठनों का समर्थन प्राप्त है, जिनमें नेशनल प्रेसिडेंट नेहा बोरा के नेतृत्व वाला AISA, SFI, AISF और ASAP शामिल हैं। इन संगठनों ने यह ऐलान किया है कि अनुमति न मिलने के बावजूद वे विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे और जहां भी उन्हें रोका जाएगा, वहीं प्रदर्शन करेंगे।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और बलों की तैनाती
आगामी प्रदर्शन को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 8 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक 110 CAPF कंपनियों की तैनाती को मंजूरी दी है। इसमें कुल मिलाकर लगभग 20,000 से 23,000 जवान शामिल होंगे।
यह अतिरिक्त बल शहर में पहले से तैनात 15,000 CAPF कर्मियों की मदद करेगा। इस नई तैनाती में 85 CRPF, 7 ITBP, 10 SSB और 1 CISF कंपनी शामिल है। विशेष रूप से इसमें महिला कर्मियों की कम से कम पांच कंपनियां भी तैनात की गई हैं।
पुलिस की रणनीति और पाबंदियां
दिल्ली पुलिस ने स्थानीय निवासियों, पीजी मालिकों और मार्केट एसोसिएशन के साथ संपर्क अभियान शुरू किया है। पुलिस प्रशासन नागरिकों को इस विरोध प्रदर्शन में शामिल न होने की सलाह दे रहा है।
प्रशासन ने जंतर मंतर, संसद मार्ग और आकाशवाणी भवन के चारों ओर कई स्तरों पर बैरिकेडिंग कर दी है। पुलिस राज्य की सीमाओं पर नजर रख रही है और संभावित प्रदर्शनकारियों को ट्रैक कर रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक 8 अक्टूबर से कुछ एक्टिविस्टों को उनके घरों में ही नजरबंद करने और कुछ मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद करने की योजना बनाई गई है। यूट्यूबर ध्रुव राठी ने भी इस मुद्दे का समर्थन किया है, जिन्होंने 8 अक्टूबर को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में हुए एक संबंधित विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था।
प्रदर्शनकारियों की मांगें और पुलिस के नियम
कॉकरोच जनता पार्टी केवल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग नहीं कर रही है, बल्कि उनकी अन्य मांगें भी हैं। इनमें वर्तमान SIR प्रक्रिया को रोकना, जनवरी 2025 की मतदाता सूची को बहाल करना और चुनाव आयोग की नियुक्तियों से जुड़े 2023 के कानून को रद्द करना शामिल है।
- चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा।
- वर्तमान SIR प्रक्रिया पर रोक।
- जनवरी 2025 की मतदाता सूची की बहाली।
- चुनाव आयोग नियुक्ति कानून 2023 को खत्म करना।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि जंतर मंतर पर प्रदर्शन के लिए कम से कम 10 दिन पहले सूचना देना जरूरी है। पुलिस के अनुसार, यहां 1,000 से कम प्रतिभागियों तक ही सीमित प्रदर्शन की अनुमति दी जाती है। पुलिस ने सुझाव दिया है कि ऐसे बड़े कार्यक्रमों के लिए रामलीला मैदान या बुराड़ी जैसे निर्धारित स्थानों का उपयोग किया जाना चाहिए।









