कांग्रेस पार्टी के सदस्यों ने 6 अक्टूबर, 2026 को दिल्ली और भोपाल में व्यापक प्रदर्शन किए। यह विरोध प्रदर्शन पार्टी के बड़े नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वडरा की हिरासत के खिलाफ किया गया था।
नई दिल्ली में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वडरा और उनके साथ लगभग 260 अन्य लोगों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई तब हुई जब वे लोग भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के मुख्यालय की ओर मार्च कर रहे थे।
इस विरोध प्रदर्शन का आयोजन INDIA गठबंधन द्वारा किया गया था। इस प्रदर्शन के दौरान ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाए गए और मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन में गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया गया।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग और हिरासत
प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। दिल्ली पुलिस ने इन नेताओं और समर्थकों को नीति आयोग के पास हिरासत में लिया था।
हिरासत में लिए जाने के बाद, नेताओं ने आकाशवाणी भवन में नौ घंटे तक धरना दिया। इसके बाद उन्हें किंग्सवे कैंप पुलिस लाइन्स से रिहा किया गया। दिल्ली पुलिस ने कहा कि इस मार्च के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी, जबकि राहुल गांधी ने तर्क दिया कि चुनाव आयोग निर्वाचित प्रतिनिधियों के प्रति जवाबदेही से बच रहा है।
भोपाल में चुनाव आयोग कार्यालय का घेराव
इसी समय मध्य प्रदेश के भोपाल में भी कांग्रेस नेताओं और यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इन कार्यकर्ताओं ने स्थानीय चुनाव आयोग कार्यालय का घेराव किया।
इस प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह प्रमुख हस्तियों में शामिल थे। वे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी ईमानदारी के खिलाफ चल रहे विरोध में हिस्सा ले रहे थे।
कांग्रेस के पिछले विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला
कांग्रेस पार्टी द्वारा किए जा रहे ये प्रदर्शन एक लंबी श्रृंखला का हिस्सा हैं। इससे पहले 2 अक्टूबर, 2026 को जंतर मंतर पर एक प्रदर्शन किया गया था।
इससे भी पहले 28 सितंबर, 2026 को भोपाल में एक विरोध प्रदर्शन हुआ था। उस दौरान देशभर में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों को उजागर किया गया था।
- 28 सितंबर को भोपाल प्रदर्शन में जीतू पटवारी और उमंग सिंघार शामिल थे।
- इस दौरान प्रदर्शनकारियों को पुलिस के पानी की बौछारों का सामना करना पड़ा था।

























