बाराबंकी के रामसनेहीघाट स्थित चंदवल के चाइल्ड फ्रेंडली स्कूल कैंपस में मंगलवार को 20वां जननी-जनक उत्सव और वरिष्ठ नागरिक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस खास कार्यक्रम का आयोजन बेसिक उत्थान एवं ग्रामीण सेवा संस्थान द्वारा किया गया, जिसे बिरजू संस्थान के नाम से भी जाना जाता है।
इस सम्मान समारोह के दौरान जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से आए 175 वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मौजूद बेटों, बेटियों और बहुओं ने अपने माता-पिता की पारंपरिक तरीके से पूजा की और जीवनभर उनकी सेवा व सम्मान करने का संकल्प लिया।
इस पूरे कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित अवधी साहित्यकार डॉ. रामबहादुर मिश्रा ने की। कार्यक्रम में सामाजिक, शैक्षिक और चिकित्सा क्षेत्र की कई जानी-मानी हस्तियां शामिल हुईं।
पारिवारिक मूल्यों और सेवा का महत्व
संस्थान के अध्यक्ष रत्नेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि माता-पिता जीवन के पहले शिक्षक होते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि माता-पिता की सेवा करना एक जीवनभर का संस्कार है, न कि केवल एक दिन की जिम्मेदारी।
उन्होंने आगे कहा कि आजकल बदलती जीवनशैली के कारण बुजुर्गों में अकेलापन बढ़ रहा है। ऐसे में इस तरह के आयोजनों से परिवार जुड़ते हैं और नई पीढ़ी को पारंपरिक मूल्यों से सीखने का मौका मिलता है।
बुजुर्गों के सम्मान पर विशेषज्ञों के विचार
वरिष्ठ नेत्र सर्जन डॉ. विवेक वर्मा ने कार्यक्रम में कहा कि बुजुर्गों का सम्मान करने से परिवार की इकाई मजबूत होती है। शिक्षा विभाग के पूर्व उपनिदेशक वसुमती अग्निहोत्री ने माता-पिता को परिवार की सबसे बड़ी पूंजी बताया।
डॉ. अर्जुन पांडेय सहित अन्य वक्ताओं ने भी इसी बात को दोहराया। उन्होंने कहा कि अपने माता-पिता की सेवा करने से बड़ी कोई और पूजा नहीं है।
कार्यक्रम में शामिल प्रमुख लोग और भंडारा
इस समारोह में बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित नाम शामिल थे:
- पूनम सिंह
- अनीता प्रताप
- शैलेंद्र सिंह
- डॉ. विनय दास
- बाबूलाल वर्मा
- डॉ. शशि कुमार अवस्थी
- डॉ. अंबरीश अंबर
- हुमायूं नईम खान
कार्यक्रम के समापन के बाद वहां एक सामुदायिक भोज यानी भंडारे का आयोजन किया गया। इस भंडारे में लगभग 1,000 लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।

























