दिल्ली सरकार ने शहर के लास्ट-माइल ट्रांसपोर्ट सेक्टर को नियंत्रित करने के लिए ‘दिल्ली ई-रिक्शा रजिस्ट्रेशन एंड ऑपरेशन स्कीम 2026’ का ड्राफ्ट जारी किया है। इस प्रस्तावित योजना के तहत ई-रिक्शा के संचालन के लिए कई कड़े नियम बनाए गए हैं। इनमें यात्रियों की संख्या सीमित करना और रफ्तार पर लगाम लगाना मुख्य है।
नए नियमों के मुताबिक अब एक ई-रिक्शा में अधिकतम चार सवारी ही बैठ सकेंगी। साथ ही वाहनों की रफ्तार 25 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा नहीं होगी। पूरे शहर में ई-रिक्शा की कुल संख्या भी 2.5 लाख तक सीमित रखने का प्रस्ताव है, ताकि सुरक्षा संबंधी बढ़ती चिंताओं को दूर किया जा सके।
इन नियमों को लाने के पीछे बढ़ते हादसों का बड़ा हाथ है। ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2025 के मध्य तक ई-रिक्शा से जुड़े 108 हादसे हुए। इन दुर्घटनाओं में 24 लोगों की जान चली गई और 100 लोग घायल हुए। अधिकारियों का कहना है कि 2014 के शुरुआती ढांचे के बाद से ई-रिक्शा की संख्या तेजी से बढ़ी है और 2026 की शुरुआत तक पंजीकृत वाहनों की संख्या 2 लाख से ज्यादा हो गई है।
वाहन चलाने और तकनीकी मानकों के नए नियम
ड्राफ्ट स्कीम में ऑपरेटरों के लिए तकनीकी और कानूनी सीमाएं तय की गई हैं। ड्राइवर को छोड़कर अधिकतम चार यात्रियों की अनुमति होगी। रिक्शा में खड़े होकर यात्रा करने या ड्राइवर के बगल में बैठने की अनुमति बिल्कुल नहीं होगी।
वाहन की मोटर पावर 2,000 वाट से अधिक नहीं होनी चाहिए। कानूनी तौर पर रिक्शा चलाने के लिए ड्राइवर के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस और PSV बैज होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा डिजिटल ट्रैकिंग और मालिकाना हक की सीमाएं भी तय की गई हैं।
सरकार ने डिजिटल ई-रिक्शा कम्प्लायंस सर्टिफिकेट यानी ECC का प्रस्ताव रखा है। यह सर्टिफिकेट दो साल के लिए वैध होगा और इसे एक खास वाहन और ड्राइवर से लिंक करना होगा। मालिकाना हक के मामले में नियम इस प्रकार हैं:
- एक व्यक्ति अधिकतम पांच ई-रिक्शा का मालिक हो सकता है।
- बड़ी संस्थाओं या कंपनियों के लिए यह सीमा 100 वाहनों तक तय की गई है।
- वाहनों में बुल बार और म्यूजिक सिस्टम लगाने पर पाबंदी होगी क्योंकि इनसे दूसरे चालकों का ध्यान भटकता है।
लाइसेंस उल्लंघन पर कार्रवाई और फीडबैक की प्रक्रिया
नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए कड़े इंतजाम किए गए हैं। ड्राफ्ट के अनुसार, जो वाहन बिना रजिस्ट्रेशन के चलेंगे, उन्हें जब्त कर लिया जाएगा और बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों को नष्ट (crush) भी किया जा सकता है।
मौजूदा ऑपरेटरों को इन बदलावों को अपनाने के लिए एक ट्रांजिशन पीरियड यानी बदलाव की अवधि दी जाएगी। यह अवधि नियमों के अंतिम रूप लेने के बाद शुरू होगी। सरकार का लक्ष्य है कि इन नियमों को 90 दिनों के भीतर लागू कर दिया जाए।
इस ड्राफ्ट को 18 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया था। अब आम जनता और संबंधित लोगों के लिए 30 दिनों तक अपनी राय और सुझाव देने का मौका खुला है।
यात्री सुरक्षा और ड्राइवरों की कमाई पर प्रभाव
ट्रांसपोर्ट विभाग के लिए यात्रियों की सुरक्षा और ड्राइवरों की रोजी-रोटी के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती है। रिपोर्टों के मुताबिक, ओवरक्राउडिंग यानी भीड़ कम करने से यात्रियों और पैदल चलने वालों की सुरक्षा तो बढ़ेगी, लेकिन इससे ड्राइवरों की दैनिक कमाई घट सकती है क्योंकि वे ज्यादा सवारियों से ज्यादा पैसे कमाते हैं।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि डेटा पर आधारित इन सीमाओं से दुर्घटनाएं कम हो सकती हैं। हालांकि, इसका स्कूल ट्रांसपोर्ट की लागत पर क्या असर पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
इच्छुक लोग अपने सुझाव ईमेल के जरिए schemeconsultation2026@gmail.com पर भेज सकते हैं या निर्धारित डाक पते पर भेज सकते हैं। सरकारी अधिकारी इन सुझावों की समीक्षा करेंगे और उसके बाद योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद राज्य सरकार एक औपचारिक अधिसूचना जारी करेगी, जिससे इस नई पॉलिसी को चरणों में लागू किया जाएगा।

























