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कार्यालय में वसीम राईन की बैठक, ‘सेव इंडिया, सेव शरीया’ अभियान पर जताई आपत्ति ! 

कार्यालय में वसीम राईन की बैठक, ‘सेव इंडिया, सेव शरीया’ अभियान पर जताई आपत्ति !

रिपोर्ट:- राहुल त्रिपाठी

बाराबंकी:-  ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसीम राईन ने अपने कैम्प कार्यालय पर कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों के साथ बैठक कर आगामी सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा 17 सितंबर से प्रस्तावित तीन महीने के देशव्यापी ‘सेव इंडिया, सेव शरीया’ अभियान को लेकर भी उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

वसीम राईन ने कहा कि ‘देश बचाओ, शरीयत बचाओ’ जैसे भावनात्मक और धार्मिक नारों के साथ अभियान चलाने से समाज में अनावश्यक धार्मिक ध्रुवीकरण बढ़ने की आशंका रहती है। उनके मुताबिक वर्तमान परिस्थितियों में मुस्लिम शरीया को लेकर कोई ऐसा नया खतरा स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहा है, जिसके लिए इस तरह के देशव्यापी अभियान की आवश्यकता हो। उन्होंने कहा कि मुस्लिम धार्मिक नेतृत्व को भावनात्मक मुद्दों के बजाय संविधान, लोकतंत्र, नागरिक अधिकार, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय जैसे व्यापक सवालों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

उन्होंने पर्सनल लॉ बोर्ड की संरचना में पसमांदा मुसलमानों की भागीदारी को लेकर भी सवाल उठाया। राईन ने कहा कि पसमांदा समाज की आबादी बड़ी संख्या में होने के बावजूद धार्मिक संस्थाओं के शीर्ष स्तर पर उनका पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने दावा किया कि पसमांदा मुसलमानों के वास्तविक सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को धार्मिक नेतृत्व की प्राथमिकताओं में पर्याप्त स्थान मिलना चाहिए।

बैठक में उन्होंने शाहबानो प्रकरण और बाबरी मस्जिद विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अतीत के अनुभवों से सबक लेते हुए मुस्लिम नेतृत्व को ऐसे फैसलों और आंदोलनों से बचना चाहिए, जिनसे समाज में तनाव बढ़े या राजनीतिक ध्रुवीकरण को बल मिले। उन्होंने बिहार में पूर्व मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड महासचिव मौलाना वली रहमानी से जुड़ी ‘देश बचाओ, दीन बचाओ’ रैली का भी उल्लेख करते हुए मुस्लिम धार्मिक संगठनों और राजनीति के बीच संबंधों को लेकर सवाल उठाए।

राईन ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले कुछ मुस्लिम नेताओं एवं सेवानिवृत्त अधिकारियों की संघ प्रमुख मोहन भागवत से हुई मुलाकातों का हवाला देते हुए कहा कि मुस्लिम समाज के नेतृत्व को अपनी राजनीतिक दिशा और सार्वजनिक बयानों में पारदर्शिता रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन या व्यक्ति को राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

उन्होंने मुस्लिम धार्मिक संस्थानों की कार्यप्रणाली और राजनीतिक संपर्कों पर भी सवाल उठाए तथा आरोप लगाया कि कुछ बड़े संस्थान सामाजिक संगठनों की तरह कार्य करते हैं और उनके राजनीतिक संबंधों को लेकर समाज में सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं की गतिविधियों और आर्थिक स्रोतों में पारदर्शिता होनी चाहिए।

बैठक के दौरान वसीम राईन ने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मुस्लिम धार्मिक संगठनों से भावनात्मक और मजहबी अभियानों से दूर रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज की राजनीतिक दिशा संविधान, लोकतंत्र, मताधिकार, सामाजिक न्याय, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों पर केंद्रित होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि पसमांदा समाज को अपनी आवाज स्वयं बुलंद करनी होगी और किसी भी राजनीतिक या धार्मिक संगठन के पीछे आंख बंद करके चलने के बजाय अपने अधिकारों और प्रतिनिधित्व के सवालों को प्रमुखता देनी होगी। बैठक में मौजूद कार्यकर्ताओं ने भी सामाजिक एवं राजनीतिक मुद्दों पर अपने विचार रखे। अंत में वसीम राईन ने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने और समाज के व्यापक हितों को लेकर आगे की रणनीति तैयार करने पर जोर दिया।

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