Maruti Suzuki ने Telangana transport department के साथ एक औपचारिक समझौता किया है, जिसके तहत छह अलग-अलग स्थानों पर 12 ऑटोमेटेड ड्राइविंग लाइसेंस टेस्ट ट्रैक बनाए जाएंगे। यह पहल एक कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य मानकीकृत और तकनीक आधारित ड्राइवर मूल्यांकन प्रणालियों के जरिए सड़क सुरक्षा को बढ़ाना है।
इन सुविधाओं में हाई डेफिनेशन कैमरों और रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) सेंसर जैसे एडवांस हार्डवेयर लगाए जाएंगे, जो ड्राइवर के प्रदर्शन की निगरानी करेंगे। Fortune India और The Economic Times की 6 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, यह तकनीक टेस्टिंग प्रक्रिया से मानवीय व्यक्तिपरकता (human subjectivity) को खत्म कर देगी। इस ऑटोमेशन से यह सुनिश्चित होगा कि लाइसेंस परीक्षा के दौरान हर आवेदक का मूल्यांकन एक समान मानदंडों पर किया जाए।
डिजिटल टेस्टिंग से सड़क सुरक्षा में सुधार
राज्य के अधिकारियों के लिए सड़क दुर्घटनाएं एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई हैं। टेस्टिंग वातावरण को डिजिटल बनाकर सरकार का लक्ष्य उन गलतियों को रोकना है, जो अक्सर मैनुअल निगरानी के कारण होती हैं। इस पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक सड़कों पर नए ड्राइवरों की गुणवत्ता में सुधार करना है।
इन 12 ट्रैक्स की तैनाती राज्य परिवहन विभाग द्वारा संचालित टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में एक बड़ा विस्तार है। प्रत्येक स्थान स्थानीय लोगों को वाहन नियंत्रण और ट्रैफिक नियमों के पालन के परीक्षण के लिए एक नियंत्रित वातावरण प्रदान करेगा। सेंसर्स के एकीकरण से यह रीयल टाइम डेटा इकट्ठा किया जा सकेगा कि उम्मीदवार विशिष्ट पैंतरे (maneuvers) को कैसे संभालते हैं।
Maruti Suzuki इस रोलआउट में तकनीकी भागीदार के रूप में काम कर रही है। कंपनी के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि फर्म इस प्रयास को अपने रोड सेफ्टी मैंडेट का एक प्रमुख स्तंभ मानती है। समझौते में शामिल सभी हितधारकों को उम्मीद है कि ये ट्रैक अन्य क्षेत्रों में परिवहन विभाग के भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए एक मॉडल के रूप में काम करेंगे।
प्रोजेक्ट का दायरा इन मापदंडों द्वारा निर्धारित है:
- ऑटोमेटेड ट्रैक्स की कुल संख्या: 12
- कुल प्रोजेक्ट लोकेशन: 6
- मुख्य तकनीक: हाई डेफिनेशन कैमरे और RFID सेंसर
- साझेदार संगठन: Maruti Suzuki और Telangana transport department
लाइसेंस जारी करने का नियामक नियंत्रण राज्य सरकार के पास रहेगा, जबकि इंफ्रास्ट्रक्चर यह सुनिश्चित करेगा कि टेस्टिंग मानक अपडेटेड सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करें। भविष्य की योजनाओं में यह संभावना है कि यदि शुरुआती चरण सफल रहता है, तो इस मॉडल को अतिरिक्त जिलों में विस्तारित किया जा सकता है। समझौते पर हस्ताक्षर के तुरंत बाद इन ट्रैक्स का कार्यान्वयन शुरू हो जाएगा।









