गृह मंत्रालय ने इमिग्रेशन और फॉरेनर्स एक्सेम्पशन ऑर्डर में बदलाव किया है। इसके तहत अब अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के छह अल्पसंख्यक समूहों को भारत में अपनी मौजूदगी जारी रखने के लिए वैध वीजा लेना होगा।
यह आदेश उन लोगों पर लागू होता है जो 31 दिसंबर 2024 को या उससे पहले बिना उचित दस्तावेजों या एक्सपायर हो चुके यात्रा कागजात के साथ देश में दाखिल हुए थे। इस बदलाव के बाद हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के सदस्यों को देश में अपनी उपस्थिति को नियमित करना होगा। द हिंदू और स्क्रॉल डॉट इन द्वारा पुष्ट रिपोर्टों के अनुसार, सरकार की अधिसूचना S.O. 6027(E) 5 नवंबर 2026 को प्रकाशित की गई थी।
वीजा नियमों में बदलाव और प्रशासनिक कदम
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि हालांकि शुरुआती प्रवेश छूट बरकरार है, लेकिन नया नियम स्टेटस में बदलाव के लिए मजबूर करता है। आधिकारिक आदेश के मुताबिक, भारत में प्रवेश के बाद ऐसे प्रत्येक व्यक्ति को अपनी निरंतर उपस्थिति के लिए वीजा की उचित श्रेणी प्राप्त करनी होगी।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और गृह मंत्रालय इसे उन लोगों के लिए सख्त प्रशासनिक निगरानी की दिशा में एक कदम मान रहे हैं जिन्होंने धार्मिक उत्पीड़न के कारण शरण ली थी। कानूनी विश्लेषकों का कहना है कि यह संशोधन एक नियामक ढांचा तैयार करता है जो मौजूदा कानूनों के समानांतर चलेगा।
सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट (CAA) अपने प्रावधानों के लिए 31 दिसंबर 2014 की कट-ऑफ तारीख पर निर्भर करता है। वीजा आवश्यकताओं के लिए 31 दिसंबर 2024 की तारीख तय करके, सरकार ने प्रभावी रूप से शरणार्थियों के अलग-अलग समूहों के लिए दो अलग शासन व्यवस्थाएं बना दी हैं। यह कदम शुरुआती प्रवेश छूट की मानवीय भावना को बनाए रखते हुए एक संभावित खामी को बंद करने का काम करता है।
हितधारकों पर प्रभाव और कानूनी स्थिति
विभिन्न अधिकार समूहों और आलोचकों ने सवाल उठाए हैं कि इससे कमजोर आबादी पर व्यावहारिक बोझ बढ़ेगा। वीजा आवेदन की प्रक्रिया उन परिवारों के लिए जटिल नौकरशाही बाधाएं पैदा कर सकती है जो पहले से ही दस्तावेजों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
इस बदलाव के समर्थकों का तर्क है कि अधिकारियों के पास अब इस बात का स्पष्ट रिकॉर्ड होगा कि वर्तमान में भारत में कौन रह रहा है। यह स्पष्टता कानूनी स्थिति दर्ज होने के बाद पात्र व्यक्तियों को सामाजिक सेवाओं तक आसानी से पहुंचने में मदद कर सकती है। नीति लागू होने पर पहचान और सुविधा प्रक्रिया में राज्य सरकारों की केंद्रीय भूमिका होने की संभावना है।
गृह मंत्रालय यह बताने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगा कि इन समूहों के लिए वीजा की कौन सी श्रेणियां उपयुक्त हैं। जब तक ये विशिष्ट प्रक्रियाएं नहीं आतीं, तब तक हजारों लोग अपनी दीर्घकालिक कानूनी स्थिति को लेकर अनिश्चितता के दौर का सामना कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा अधिसूचना के दायरे में आने वालों की ट्रैकिंग के कारण अनुपालन की भविष्य की निगरानी निश्चित रूप से बढ़ेगी।
अधिकारियों को अब इन व्यक्तियों का मिलान चल रहे सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट के आवेदनों के साथ करना होगा। प्रभावित सभी लोग गृह मंत्रालय के आगामी निर्देशों का इंतजार करेंगे ताकि यह पता चल सके कि अनुपालन के लिए कोई ग्रेस पीरियड उपलब्ध है या नहीं।









