उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित विश्व प्रसिद्ध ताजमहल के प्रवेश द्वारों के पास आवारा सांडों के झुंड खुलेआम घूम रहे हैं। इससे पर्यटकों को काफी परेशानी हो रही है और उनकी सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा हो गया है।
पर्यटक, विशेष रूप से महिलाएं और बच्चे, संभावित दुर्घटनाओं से बचने के लिए अक्सर अपने रास्ते बदलने या इन जानवरों के बीच सावधानी से चलने को मजबूर हैं। एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल होने के बावजूद, आवारा पशुओं की मौजूदगी स्थानीय प्रशासन और बुनियादी ढांचे के प्रबंधन पर सवाल उठा रही है।
प्रशासनिक जिम्मेदारी और चुनौतियां
इन जानवरों को पकड़कर शेल्टर या ‘कांजी हाउस’ भेजने की जिम्मेदारी आगरा नगर निगम (AMC) की है, जो स्मारक के आसपास के प्रबंधन के लिए जिला प्रशासन और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के साथ मिलकर काम करता है।
G-20 शिखर सम्मेलन या विदेशी राष्ट्राध्यक्षों की यात्रा जैसे हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के दौरान अक्सर विशेष सफाई अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन ऐतिहासिक रूप से ये प्रयास केवल अस्थायी समाधान साबित हुए हैं।
यह समस्या इसलिए जटिल है क्योंकि पशु मालिक दूध देना बंद करने के बाद जानवरों को सड़कों पर छोड़ देते हैं और वर्तमान पशु आश्रयों की क्षमता भी सीमित है।
नियम और अंतरराष्ट्रीय छवि पर असर
यह स्थिति सुप्रीम कोर्ट के उन पिछले निर्देशों के बावजूद बनी हुई है, जिनमें नगर निकायों को सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्रों, अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और विरासत स्थलों से आवारा पशुओं और कुत्तों को हटाने का आदेश दिया गया था।
स्थानीय व्यापार निकायों और पर्यटन विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि आवारा जानवरों की अनियंत्रित मौजूदगी शहर की अंतरराष्ट्रीय छवि पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।
6 नवंबर, 2026 तक, कोई नए बड़े पैमाने के आधिकारिक निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। निवासी और पर्यटक अब एक स्थायी और दीर्घकालिक समाधान लागू करने के लिए जिम्मेदार विभागों से हस्तक्षेप का इंतजार कर रहे हैं।









