इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत आज 12 नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए इन मैन्युफैक्चरिंग वेंचर्स में कुल 7,503 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य विदेशी आयात पर भारत की निर्भरता को कम करना और सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को मजबूत करना है। MeitY की ब्रीफिंग से मिले आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ये मंजूर प्रोजेक्ट्स गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश सहित सात राज्यों में फैले हुए हैं।
उत्पादन और निवेश का विवरण
इस चरण में शामिल निर्माता कॉपर फॉयल, एनोड और कैथोड सामग्री और प्रिंटेड सर्किट बोर्ड जैसी जरूरी चीजें बनाएंगे। सबसे बड़ा एकल निवेश Indo Asia Copper की ओर से है, जिसने गुजरात में एक फैसिलिटी के लिए 3,546 करोड़ रुपये देने का वादा किया है।
MeitY द्वारा साझा किए गए अनुमान बताते हैं कि इन 12 प्रोजेक्ट्स से 39,045 करोड़ रुपये की उत्पादन वैल्यू मिलने की उम्मीद है। सरकार का अनुमान है कि इन स्थानों पर 7,127 सीधी नौकरियां पैदा होंगी।
योजना की प्रगति और भविष्य के लक्ष्य
मंजूरियों के इस ताजा दौर के बाद इस स्कीम के तहत क्लियर किए गए आवेदनों की कुल संख्या 118 हो गई है। बिजनेस स्टैंडर्ड और द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, कुल निवेश अब बढ़कर 77,051 करोड़ रुपये हो गया है, जो इस सेक्टर के लिए सरकार के शुरुआती लक्ष्यों से अधिक है।
मंत्री Ashwini Vaishnaw ने घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम पर हालिया चर्चाओं के दौरान इन विकासों के महत्व पर जोर दिया। उनके मंत्रालय ने कंपनियों और इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स से भविष्य के आवेदन आसान बनाने के लिए ISM 2.0 एप्लीकेशन पोर्टल भी लॉन्च किया है।
CNBC TV18 और Livemint की कवरेज बताती है कि ये योजनाएं भारत को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाने की व्यापक कोशिश का हिस्सा हैं। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि सरकार आने वाले महीनों में इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए और आवेदनों की समीक्षा करेगी। कंपनियां अब प्लानिंग फेज से ऑपरेशनल डिप्लॉयमेंट की ओर बढ़ रही हैं, जिससे जल्द ही उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। इन 12 प्रोजेक्ट्स की प्रगति और नए आवेदनों पर नए पोर्टल के जरिए नजर रखी जाएगी।









