शाहजहाँपुर के स्थानीय निवासियों ने उन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया गया था कि महर्षि वाल्मीकि जुलूस का विरोध किया गया। घटना की पूरी सच्चाई बताते हुए वहां मौजूद लोगों ने कहा कि यह विरोध जुलूस के खिलाफ नहीं था।
निवासियों ने स्पष्ट किया कि सुनहरी मस्जिद के पास चौक इलाके में जो कुछ भी हुआ, वह केवल डीजे संगीत की आवाज कम करने का एक अनुरोध था। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य जुलूस को रोकना या उसका विरोध करना बिल्कुल नहीं था।
शोर से परेशान हुए स्थानीय लोग और मरीज
स्थानीय लोगों के अनुसार, महर्षि वाल्मीकि जुलूस सुनहरी मस्जिद के पास करीब 30 मिनट तक रुका रहा। इस दौरान डीजे एक ही जगह पर लगातार बहुत तेज आवाज में बजता रहा, जिससे आसपास के इलाके में काफी शोर हो गया था।
गवाहों ने बताया कि डीजे की आवाज इतनी तेज थी कि पास के शोरूमों के कांच और उनकी छतें कांपने लगीं। इस वजह से वहां रहने वाले आम लोगों और खासकर दिल के मरीजों को काफी ज्यादा परेशानी और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा।
डीजे ऑपरेटर और समिति के साथ बातचीत
परेशान लोगों ने डीजे चलाने वाले ऑपरेटर से कई बार आवाज कम करने की विनती की। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनके इस अनुरोध को शुरुआत में पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
बाद में इस मामले को सुलझाने के लिए जुलूस समिति के सदस्यों से चर्चा की गई। बातचीत के बाद डीजे की आवाज कम कर दी गई और कुछ समय के लिए संगीत को पूरी तरह बंद भी किया गया, जिसके बाद मामला शांत हुआ।
धार्मिक जुलूस के प्रति सम्मान का दावा
समुदाय के सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि इस धार्मिक जुलूस का किसी ने भी विरोध नहीं किया। उन्होंने सबूत के तौर पर बताया कि जब जुलूस चौक से गुजरा, तो उसका स्वागत फूलों की बारिश के साथ किया गया था।
- निवासियों ने कहा कि शोर कम करने की साधारण मांग को जुलूस का विरोध बताना गलत है।
- उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी खबरें भ्रामक हैं और सकारात्मक माहौल को नजरअंदाज करती हैं।
लोगों ने चिंता जताई कि शोर कम करने के एक मामूली अनुरोध को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे आयोजन के दौरान उनके बीच सकारात्मक बातचीत हुई थी, जिसे नजरअंदाज कर गलत खबरें फैलाई जा रही हैं।









