Delhi Pollution Control Committee ने शहर के 40 मुख्य स्थानों पर पार्टिकुलेट प्रदूषण को 20 प्रतिशत तक कम करने के लिए 104 करोड़ रुपये का एक प्रयोग शुरू किया है। इस एक साल के पायलट प्रोजेक्ट का उद्देश्य निजी तकनीक की मदद से सर्दियों में होने वाले स्मॉग के संकट से निपटना है। इसके लिए सार्वजनिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में परफॉर्मेंस बेस्ड कॉन्ट्रैक्टिंग लागू की जा रही है।
सर्दियों के महीनों में दिल्ली की हवा की गुणवत्ता दुनिया में सबसे खराब स्तर पर पहुंच जाती है। CPCB से जुड़े मॉनिटरिंग डेटा के अनुसार, 27 अक्टूबर 2026 को पूरे शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 160 और 175 के बीच था। वहीं CRRI Mathura Road, Jahangirpuri और Rohini जैसे स्टेशनों पर यह स्तर 240 से 260 के बीच दर्ज किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है।
टेंडर प्रक्रिया और बजट का वितरण
सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए 17 सितंबर 2026 को Government e-Marketplace यानी GeM पोर्टल के जरिए टेंडर जारी किया था। इसके बाद 6 अक्टूबर 2026 को बोलियां खोली गईं। टेंडर दस्तावेजों के मुताबिक, इस पूरे प्रोजेक्ट को 40 अलग-अलग शेड्यूल में बांटा गया है। हर एक साइट के लिए लगभग 2.6 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
नियमों के अनुसार, कोई भी एक कंपनी 10 से ज्यादा साइट्स का प्रबंधन नहीं कर सकती है। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों को किया जाने वाला भुगतान सीधे तौर पर तकनीक के प्रदर्शन यानी परफॉर्मेंस से जुड़ा होगा।
तकनीकी मानक और कंपनियों के लिए शर्तें
चयनित तकनीकों का सरकारी लैब से प्रमाणित होना अनिवार्य है। इन मशीनों को PM2.5 और PM10 दोनों के स्तर में 20 प्रतिशत की कमी लानी होगी। सरकारी खरीद नोटिस के मुताबिक, ये सिस्टम शोर या ओजोन जैसे कोई अन्य माध्यमिक खतरे पैदा नहीं करने चाहिए। कंपनियों को साइट हैंडओवर मिलने के चार हफ्ते के भीतर उपकरणों को लगाने और शुरू करने की उम्मीद है।
बोली लगाने वाली कंपनियों के लिए कुछ खास पात्रता शर्तें रखी गई हैं:
- पिछले तीन वर्षों में कंपनी का औसत वार्षिक टर्नओवर कम से कम 1 करोड़ रुपये होना चाहिए।
- DPIIT में रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स को इन नियमों में कुछ छूट मिल सकती है।
- प्रत्येक कंपनी को प्रति शेड्यूल 5 लाख रुपये की बयाना राशि (earnest money deposit) जमा करनी होगी, जो 14 महीनों के लिए मान्य होगी।
साइटों का चयन और भौगोलिक वितरण
प्रोजेक्ट के लिए चुनी गई साइट्स का आकार 1 से 1.5 एकड़ के बीच है। इनमें खुले और अर्ध-बंद सार्वजनिक स्थान शामिल हैं। कुल 40 साइटों में से 29 व्यावसायिक और बाजार क्षेत्र हैं, जो प्रोजेक्ट के कुल दायरे का 72.5 प्रतिशत हिस्सा हैं।
भौगोलिक दृष्टि से यह प्रोजेक्ट सेंट्रल और साउथ दिल्ली पर केंद्रित है, जहां 19 लोकेशन बनाई गई हैं। ट्रांस यमुना ईस्ट दिल्ली में 5 साइट्स हैं। हालांकि, बवाना और नरेला जैसे बड़े औद्योगिक इलाकों को इस शुरुआती चरण से बाहर रखा गया है। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, खान मार्केट, कनॉट प्लेस और लोटस टेम्पल कॉरिडोर को विशिष्ट स्थानों के रूप में पहचाना गया है।
विशेषज्ञों की राय और निगरानी प्रणाली
स्वतंत्र वायु गुणवत्ता विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि खुले वातावरण में हवा को साफ करना भौतिक विज्ञान की दृष्टि से एक बड़ी चुनौती है। वायुमंडलीय विज्ञान के सिद्धांतों के अनुसार, हवा की भारी मात्रा और प्रदूषण के निरंतर स्रोतों के कारण मशीनों के लिए प्रदूषकों को पूरी तरह साफ करना कठिन होता है। आलोचकों का मानना है कि ऐसे उपकरण प्रदूषण को खत्म करने के बजाय केवल एक जगह से दूसरी जगह खिसका देते हैं।
इस पूरे प्रोजेक्ट की सफलता की जांच के लिए सख्त निगरानी प्रोटोकॉल बनाए गए हैं। Delhi Pollution Control Committee की देखरेख में रोजाना सुपरविजन होगा और अंतिम परिणामों का आकलन करने के लिए एक स्वतंत्र समिति बनाई गई है। Financial Express के मुताबिक, इन परिणामों के आधार पर प्रशासन यह तय करेगा कि आने वाली सर्दियों के लिए इस मॉडल को बड़े पैमाने पर लागू करना है या नहीं।
इस ट्रायल के दौरान शहर में Graded Response Action Plan के तहत मानक उपाय जारी रहेंगे। अब अगले कदम के रूप में बची हुई बोलियों का तकनीकी मूल्यांकन किया जाएगा। एक बार उपकरण चालू होने के बाद, सरकार आने वाले एक साल तक लगातार परफॉर्मेंस डेटा ट्रैक करेगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या यह निजी हस्तक्षेप दिल्ली वासियों के लिए एक व्यावहारिक दीर्घकालिक समाधान बन सकता है।









