दिल्ली पुलिस ने एक स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) को मिली धमकियों के बाद अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। यह मजिस्ट्रेट राजनीतिक हस्तियों अशुतोष रंका और सौरव दास की जमानत याचिकाओं की सुनवाई कर रहे थे।
इस घटना की जानकारी सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को सामने आई। इस वजह से इन दोनों राजनीतिक नेताओं की जमानत की कार्यवाही को आगे बढ़ा दिया गया है।
इससे पहले रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को न्यायिक अधिकारी ने आधिकारिक तौर पर इस मामले से खुद को अलग कर लिया था। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और बताया कि आरोपियों की तुरंत रिहाई के लिए उन पर दबाव डाला जा रहा था।
मजिस्ट्रेट का हटना और पुलिस की कार्रवाई
पुलिस सूत्रों ने बताया कि मजिस्ट्रेट ने महसूस किया कि वह इतने प्रतिकूल माहौल में सुनवाई जारी रखने में असमर्थ हैं। उनकी सुरक्षा को लेकर पैदा हुए खतरे के कारण उन्होंने मामले से हटने का फैसला किया।
शुरुआती रिपोर्ट्स में इसे नॉन-कॉग्निजेबल रिपोर्ट (NCR) बताया गया था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने अब पुष्टि की है कि इस मामले में FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि धमकी देने वाले लोग कौन थे।
CJP नेताओं की गिरफ्तारी और हिरासत
अशुतोष रंका और सौरव दास कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता हैं। उन्हें 13 अक्टूबर 2026 को जंतर मंतर पर एक विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था।
इसके बाद 14 अक्टूबर 2026 को उन्हें पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। उनकी न्यायिक हिरासत 18 अक्टूबर 2026 को समाप्त हुई, जिस दिन मजिस्ट्रेट ने इस मामले से अपना नाम वापस लिया।
प्रशासन पर आरोप और कानूनी लड़ाई
CJP की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने प्रशासन की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि जमानत की प्रक्रिया को जानबूझकर देरी से चलाया जा रहा है।
रत्ना सिंह ने अधिकारियों पर आरोप लगाया कि उन्होंने स्पष्ट कारणों के बिना चार जमानतदारों को खारिज कर दिया। उन्होंने SEM कोर्ट की कार्यवाही को सत्ता का दुरुपयोग करार दिया है।
इस कानूनी मामले में अपनी पैरवी के लिए CJP ने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल को नियुक्त किया है।

























