12 अक्टूबर 2026 को इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (INDIA) गठबंधन के नेताओं ने दिल्ली में एक विरोध मार्च निकाला। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ था। विपक्षी नेताओं ने चुनावी रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) में गड़बड़ियों का आरोप लगाया है।
इस प्रदर्शन में राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव जैसे बड़े नेता शामिल हुए। इनके साथ तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार भी मौजूद रहे। विरोध प्रदर्शन के बाद सभी नेता सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़े।
पुलिस ने इस मार्च को मंजिल से करीब 600 मीटर पहले भगवान दास रोड के पास रोक दिया। सुरक्षा के लिए दिल्ली पुलिस के साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) की तैनाती की गई थी।
मेट्रो स्टेशनों की बंदी और सुरक्षा इंतजाम
सुरक्षा कारणों से दिल्ली पुलिस ने शहर के छह मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया था। इनमें जनपथ, मंडी हाउस, बाराखंभा रोड, सेंट्रल सचिवालय, राजीव चौक और पटेल चौक शामिल थे। ये स्टेशन सुबह 6:00 बजे से दोपहर 4:00 बजे तक बंद रहे।
इससे पहले रविवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिए थे कि प्रदर्शन के दौरान मेट्रो का संचालन नियमित रहे। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 19(2) का हवाला देते हुए इंटरनेट सेवाओं को भी बिना किसी बाधा के चालू रखने को कहा था।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका और मुलाकात से इनकार
विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में एक औपचारिक याचिका दायर की है। इस याचिका में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और सौगता रॉय के नाम शामिल हैं। इन नेताओं ने वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का आरोप लगाया है।
खड़गे और गांधी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से मिलने का अनुरोध किया था। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने इस मुलाकात से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि चूंकि यह मामला विचाराधीन है, इसलिए ऐसी चर्चा कानूनी रूप से उचित नहीं होगी।
नेताओं के गंभीर आरोप और चुनाव आयोग का जवाब
राहुल गांधी ने सार्वजनिक रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर “वोट चोरी” का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयुक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के दबाव में काम कर रहे हैं। गांधी ने चेतावनी दी कि चुनाव आयुक्त बच नहीं पाएंगे और इसे “भगवान शिव का तांडव” बताया।
तेजस्वी यादव ने भी इन बातों का समर्थन किया और सरकार पर लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश रचने का आरोप लगाया। वहीं, AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि 10 करोड़ नाम हटा दिए गए हैं और मांग की कि चुनाव आयुक्तों के चयन में CJI को शामिल किया जाए।
दूसरी ओर, भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। आयोग का कहना है कि SIR प्रक्रिया मानक नियमों के अनुसार अपनाई गई ताकि वोटर लिस्ट सटीक रहे। आयोग ने INDIA गठबंधन की मुलाकात की मांग को “असामान्य” बताते हुए ठुकरा दिया था।
चुनाव आयोग ने एक वरिष्ठ अधिकारी के माध्यम से ज्ञापन लेने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन विपक्ष ने इसे अस्वीकार कर दिया। इस बीच, केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने इन विरोध प्रदर्शनों को विपक्ष की “हताशा” का परिणाम बताया है।









