Skip to main content

Naradsamvad

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की कानूनी छूट खत्म कर सकती है सरकार, यूजर्स के कंटेंट के लिए कंपनियां होंगी जिम्मेदार

Naradsamvad
Naradsamvad - Narad news Agency
3 Min Read

Ministry of Electronics and IT फिलहाल एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जिसके तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को उनके यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए मिलने वाली कानूनी छूट (legal immunity) को हटाया जा सकता है। यह संभावित बदलाव IT Act 2000 की धारा 79 से जुड़ा है, जो दशकों से भारत के डिजिटल इकोसिस्टम का आधार रही है।

Ad image

Ministry of Electronics and IT ने 5 नवंबर 2026 को इस बदलाव को लेकर आधिकारिक तौर पर चर्चा शुरू कर दी है। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य अभिव्यक्ति की आजादी की सुरक्षा और गलत सूचनाओं पर नियंत्रण व प्लेटफॉर्म की जवाबदेही के बीच संतुलन बनाना है।

ALSO READ  मथुरा में कार से महिलाओं को घसीटने का मामला, CCTV वीडियो वायरल होने के बाद दो आरोपी गिरफ्तार

कानूनी छूट का दायरा और प्रभाव

वर्तमान ढांचे में, प्लेटफॉर्म्स को ‘सेफ हार्बर’ की सुविधा मिलती है, बशर्ते वे विशिष्ट ड्यू डिलिजेंस आवश्यकताओं का पालन करें। Meta, Google, X और देश में काम कर रही अन्य बड़ी संस्थाओं पर ये सुरक्षा लागू होती हैं।

यदि सरकार इस योजना के साथ आगे बढ़ती है, तो ये कंपनियां यूजर्स द्वारा डाले गए कंटेंट के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हो सकती हैं। इस बदलाव से प्लेटफॉर्म्स को बहुत सख्त मॉडरेशन तकनीक अपनाने या व्यापक स्व-नियमन (self regulation) की ओर बढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

डिजिटल नुकसान को प्रबंधित करने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने इन कड़े नियंत्रणों में रुचि दिखाई है। हालांकि, इंडस्ट्री के प्लेयर्स इसका विरोध कर रहे हैं क्योंकि उन्हें अनुपालन लागत (compliance costs) काफी बढ़ने की आशंका है।

ALSO READ  बाराबंकी के रामनगर में जनगणना 2027 प्रशिक्षण का तीसरा बैच पूरा, 135 शिक्षकों ने ली शपथ

डिजिटल अधिकार समर्थकों ने चिंता जताई है कि इन सुरक्षा उपायों को हटाने से बोलने की आजादी पर बुरा असर पड़ सकता है। इन समूहों ने चेतावनी दी है कि इंटरनेट की सफाई के प्रयास में सरकार को अतिरेक से बचना चाहिए। इंडस्ट्री प्रतिनिधि अब वर्तमान छूट के प्रावधानों की जगह स्पष्ट और अनुमानित दिशा-निर्देशों की मांग कर रहे हैं।

नियामक दिशा में अनिश्चितता

विचार-विमर्श के इस चरण में कई महत्वपूर्ण विवरण अभी भी स्पष्ट नहीं हैं। सरकार ने अभी तक कोई अंतिम प्रस्ताव या कोई निश्चित समयसीमा जारी नहीं की है कि नए नियम या कानून कब लाए जाएंगे।

ALSO READ  नोएडा मीडिया क्लब ने जॉइंट CP को किया सम्मानित और DCP को दी विदाई

कंटेंट क्रिएटर्स और आम यूजर्स सहित सभी हितधारक इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि ये बदलाव सोशल मीडिया टूल्स के साथ उनके दैनिक व्यवहार को कैसे बदलेंगे। IT Ministry अपनी स्थिति को और स्पष्ट करने के लिए आगे की चर्चा कर सकती है।

संभावना है कि संसद में औपचारिक विधेयक पेश करने से पहले अधिकारी जनता की राय के लिए ड्राफ्ट नियम जारी करें। पूरी प्रक्रिया अभी लचीली है क्योंकि सरकार मजबूत कंटेंट नियंत्रण के लाभों और डिजिटल इनोवेशन के रुकने के जोखिम के बीच तुलना कर रही है।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Home
Search
अपना ज़िला चुनें
error: Content is protected !!