दिल्ली के चावड़ी बाजार इलाके में आज एक निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत गिरने से दो लोगों की मौत हो गई और कई अन्य के मलबे में दबे होने की आशंका है। यह हादसा सुबह करीब 9:50 बजे हुआ, जब शीश महल की गली सितारा में स्थित इस इमारत की तीसरी मंजिल पर निर्माण श्रमिक स्लैब डाल रहे थे।
सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विसेज और नेशनल डिजास्टर रिलीफ फोर्स (NDRF) की इमरजेंसी रिस्पांस टीमों को तुरंत मौके पर भेजा गया। अधिकारियों ने मलबे से दो शव बरामद किए हैं, जिनकी पहचान 40 वर्षीय किशोरी और 45 वर्षीय संजीत के रूप में हुई है। मृतक दोनों निर्माण श्रमिक थे, जिनमें से कई मंडावली की रेलवे कॉलोनी में रहते हैं।
लापरवाही और कानूनी कार्रवाई
सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस ने बताया कि जब इमारत गिरी तब वहां पंद्रह श्रमिक मौजूद थे। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि 50 वर्ग गज के प्लॉट पर बने पिलर स्ट्रक्चर निर्माण के वजन को सहने में असमर्थ थे। अधिकारियों ने नोट किया कि यह इमारत बिना किसी स्वीकृत प्लान के लगभग डेढ़ महीने से बन रही थी।
इस घटना के बाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ दिल्ली ने असिस्टेंट इंजीनियर मोहम्मद नईम और जूनियर इंजीनियर अमन दलाल को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई अनधिकृत निर्माण से जुड़ी लापरवाही के आरोपों के कारण की गई है। दिल्ली पुलिस ने साइट के जिम्मेदार मालिकों और ठेकेदारों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 के तहत एफआईआर दर्ज की है।
आगे के नुकसान को रोकने के लिए आसपास की इमारतों को खाली कराया गया और स्थानीय निवासियों व अधिकारियों द्वारा स्थिति संभाली जा रही है। अर्बन प्लानर्स का कहना है कि चावड़ी बाजार जैसे ऐतिहासिक बाजारों की घनी बनावट इमरजेंसी सेवाओं के लिए बड़ी चुनौतियां पैदा करती है। इन संकरी गलियों की वजह से स्ट्रक्चरल फेल्योर के समय जटिल बचाव कार्यों के लिए जरूरी भारी मशीनरी की आवाजाही में बाधा आती है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता स्थिति की निगरानी कर रही हैं, जबकि सर्च और रेस्क्यू टीमें मलबे की तलाशी ले रही हैं। जीवित बचे लोगों ने जांचकर्ताओं को दिए बयानों में साइट पर औपचारिक सुरक्षा प्रोटोकॉल की कमी की पुष्टि की है। यह घटना भीड़भाड़ वाले शहरी क्षेत्रों में त्योहारों के समय अनियमित निर्माण कार्यों से जुड़े खतरों को उजागर करती है।
बचाव कार्य और आगामी कदम
अधिकारी वर्तमान में यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि गिरी हुई इमारत के नीचे अभी और कितने लोग दबे हो सकते हैं। स्ट्रक्चरल फेल्योर की पूरी जांच से ऐसे निष्कर्ष निकलने की उम्मीद है, जिससे उच्च रैंकिंग वाले म्युनिसिपल अधिकारियों पर और प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है। प्रशासन ने संकेत दिया है कि इस त्रासदी के बाद पुरानी दिल्ली में बिल्डिंग मानदंडों और प्रवर्तन नीतियों की समीक्षा की जाएगी।
मौके पर तैनात दिल्ली फायर सर्विसेज और NDRF कर्मियों का प्राथमिक फोकस अब भी बचाव कार्यों पर है। बिल्डरों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और कानूनी प्रक्रिया के बीच पीड़ितों के परिवार अपडेट का इंतजार कर रहे हैं। शहर के योजनाकार अब उच्च घनत्व वाले इसी तरह के क्षेत्रों में भविष्य के सेफ्टी ऑडिट पर विचार कर रहे हैं।









