अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में छात्र संघ चुनाव दोबारा शुरू कराने की मांग को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन 18वें दिन भी जारी रहा। छात्र कार्यकर्ता यासिर फहाद अभी भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं।
यासिर फहाद उर्दू के पोस्ट ग्रेजुएट छात्र हैं जिन्होंने 21 सितंबर, 2026 को अपना उपवास शुरू किया था। लगातार उपवास के कारण उनकी सेहत में काफी गिरावट आई है और उनकी स्थिति गंभीर बनी हुई है।
मेडिकल टीमों ने जांच के बाद पुष्टि की है कि यासिर फहाद में डिहाइड्रेशन के लक्षण दिख रहे हैं। साथ ही उनकी रिपोर्ट में कैल्शियम और पोटैशियम की भारी कमी पाई गई है।
स्वास्थ्य और प्रशासन की कोशिशें
AMU के प्रॉक्टर नावेद खान ने बताया कि यासिर फहाद का ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक गिर गया है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उन्हें तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाने की कोशिश की।
प्रशासन की इन कोशिशों को प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने शुरुआत में रोक दिया। कैंपस में सैकड़ों छात्र लगातार धरने पर बैठे हुए हैं और अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
छात्रों की मुख्य मांगें और विरोध
प्रदर्शनकारी छात्रों की सबसे बड़ी मांग यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव फिर से शुरू करना है। यूनिवर्सिटी में पिछले आठ वर्षों से ये चुनाव नहीं कराए गए हैं।
चुनावों के अलावा प्रदर्शनकारी निम्नलिखित मांगें भी कर रहे हैं:
- प्रॉक्टर का इस्तीफा किया जाए।
- छात्रों के खिलाफ दर्ज की गई FIR वापस ली जाएं।
- निलंबित किए गए छात्रों को फिर से बहाल किया जाए।
बाहरी समर्थन और कानूनी कार्रवाई
इस आंदोलन ने अब क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा है। 6 अक्टूबर, 2026 को जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के छह छात्र नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल एकजुटता दिखाने के लिए यहां पहुंचा।
वहीं, AMU के पूर्व छात्र और वकील सैयद कैफ हसन ने कुलपति को एक कानूनी नोटिस भेजा है। इस नोटिस में लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों को लागू करने और भूख हड़ताल को समाप्त करने का समाधान मांगा गया है।
AMU प्रशासन का कहना है कि वह चुनाव के लिए एक व्यावहारिक समय सीमा तलाश रहा है। दूसरी ओर, छात्रों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी जानबूझकर उनकी आवाज को दबाने के लिए देरी कर रही है।
तनाव बढ़ने के कारण पूरे कैंपस में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। 7 अक्टूबर, 2026 को महिला छात्रों ने भी इस आंदोलन में सक्रिय रूप से हिस्सा लेना शुरू कर दिया है। यासिर फहाद और उनके समर्थकों ने साफ किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, विरोध जारी रहेगा।

























