उत्तर प्रदेश सरकार ने सीतापुर के पूर्व सांसद राजेश वर्मा को उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के रूप में फिर से नियुक्त किया है। इस निर्णय के माध्यम से उन्हें एक बार फिर आयोग की कमान सौंपी गई है।
सरकार द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, अध्यक्ष और आयोग के सभी सदस्यों का कार्यकाल एक वर्ष के लिए निर्धारित किया गया है। यह कार्यकाल उस तारीख से प्रभावी माना जाएगा जिस दिन वे अपना पद संभालेंगे।
नियुक्ति की प्रक्रिया और समय सीमा
इस पूरी नियुक्ति प्रक्रिया की शुरुआत अगस्त 2024 में हुई थी। राजेश वर्मा ने पहली बार 3 सितंबर 2024 को आयोग का कार्यभार संभाला था, जिसके बाद अब उनकी दोबारा नियुक्ति की गई है।
आयोग के प्रशासनिक ढांचे को व्यवस्थित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के बाद अब औपचारिक रूप से उनकी भूमिका तय की गई है।
आयोग की संरचना और प्रशासनिक मंजूरी
राजेश वर्मा के नेतृत्व के साथ आयोग में अन्य महत्वपूर्ण पदों का भी विवरण दिया गया है। आयोग की संरचना में निम्नलिखित सदस्य शामिल रहे हैं:
- मिर्जापुर से सोहनलाल श्रीमाली उपाध्यक्ष के रूप में।
- रामपुर से सूर्य प्रकाश पाल उपाध्यक्ष के रूप में।
- कुल 24 अन्य सदस्य।
इन नियुक्तियों की प्रशासनिक प्रक्रिया राज्यपाल की मंजूरी के बाद पूरी हुई है। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी किए गए हैं।
राज्य में पिछड़ा वर्ग के हितों की सुरक्षा
राजेश वर्मा को राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त है। वह इसी गरिमा के साथ आयोग के कार्यों का संचालन करना जारी रखेंगे।
उनकी मुख्य जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य के भीतर पिछड़ा वर्ग के हितों की रक्षा करना और उन्हें बढ़ावा देना है। वह आयोग के जनादेश के अनुसार इन वर्गों के कल्याण के लिए काम करते रहेंगे।

























