कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने देश में चल रही चुनाव प्रक्रियाओं को अवैध करार दिया है।
खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को उनके पदों पर ‘अवैध’ कब्जा करने वाला बताया। इसके साथ ही उन्होंने सभी मौजूदा मुख्यमंत्रियों को भी अवैध घोषित कर दिया है।
उन्होंने मांग की है कि वर्तमान राज्य सरकारों को भंग किया जाए। साथ ही उन्होंने वोटिंग के लिए दोबारा कागज के बैलेट पेपर की प्रणाली शुरू करने की मांग की है। उनका आरोप है कि वर्तमान नेतृत्व देश को तबाह कर रहा है और लोकतंत्र को कमजोर कर रहा है।
चुनाव आयोग और वोट चोरी का आरोप
मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि इन दोनों ने चुनाव आयोग को अपनी कठपुतली बना लिया है ताकि चुनावी जीत हासिल करने के लिए ‘वोट चोरी’ की जा सके।
विपक्ष का गठबंधन INDIA अब अपना दबाव बढ़ा रहा है। यह गठबंधन मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग कर रहा है। राहुल गांधी ने 24 सितंबर 2026 को ज्ञानेश कुमार को ‘गद्दार’ कहा था।
विपक्ष अब मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संसद में एक प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा, वोटिंग की ईमानदारी पर चिंता जताने के लिए अगले एक महीने में पांच बड़ी रैलियां आयोजित करने की योजना है। इसमें 1 नवंबर 2026 को दिल्ली में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन भी शामिल है।
विपक्षी नेताओं का आंदोलन और राष्ट्रपति से मुलाकात
विपक्षी नेताओं की योजना अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने की है। इस मुलाकात के दौरान वे अपनी शिकायतों और समस्याओं को राष्ट्रपति के सामने रखेंगे।
लोकतंत्र को बचाने के लिए देशव्यापी ‘सेव डेमोक्रेसी’ मार्च चलाया जा रहा है। यह मार्च 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इस अभियान के तहत विपक्षी सदस्य जिलाधिकारियों को ज्ञापन सौंप रहे हैं।
- विपक्षी दल 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग की ओर मार्च करेंगे।
- वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर पारदर्शिता की मांग की गई है।
- हटाए गए नामों की जानकारी और प्रभावित मतदाताओं के लिए अपील प्रक्रिया की मांग की गई है।
चुनाव आयोग का जवाब और सुप्रीम कोर्ट का फैसला
विपक्षी दलों के आरोपों के बाद भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 3 अक्टूबर 2026 को एक घोषणा की। आयोग ने कहा कि वह एक विशेष अभियान शुरू करेगा। इसके तहत बूथ लेवल ऑफिसर घर-घर जाकर सर्वे करेंगे ताकि SIR प्रक्रिया के दौरान छूटे हुए नामों की जांच कर उन्हें दोबारा जोड़ा जा सके।
संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत निर्वाचन आयोग एक स्वायत्त संवैधानिक प्राधिकरण के रूप में काम करता है। इसके बावजूद, विपक्षी दल इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) पर निर्भरता को चुनौती दे रहे हैं।
हालांकि, मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला सुनाया था। अदालत ने कहा था कि बैलेट पेपर पर वापस लौटना एक ‘प्रतिगामी कदम’ होगा, यानी यह पीछे की ओर जाने जैसा होगा।

























