उत्तर प्रदेश सरकार ने आने वाले चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर प्रशासनिक स्तर पर बड़े पैमाने पर फेरबदल शुरू कर दिया है। इस प्रक्रिया के तहत दर्जनों IAS, IPS और PCS अधिकारियों का तबादला किया गया है।
3 अक्टूबर 2026 को राज्य सरकार ने पंचायती राज, मेडिकल एजुकेशन, माइनिंग और विकास प्राधिकरणों जैसे महत्वपूर्ण विभागों में 15 IAS और 23 PCS अधिकारियों के तबादले किए।
सरकार ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे तुरंत अपने नए पदों का कार्यभार संभाल लें। यह पूरी कवायद चुनाव से पहले सरकारी मशीनरी को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से की गई है।
महत्वपूर्ण पदों पर नई नियुक्तियां
इस फेरबदल में कई वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। सचिन कुमार सिंह को मेडिकल एजुकेशन का स्पेशल सेक्रेटरी बनाया गया है, जबकि उज्जवल कुमार को माइनिंग विभाग का स्पेशल सेक्रेटरी नियुक्त किया गया है।
अन्य महत्वपूर्ण नियुक्तियों में जे. रीभा को मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन का MD और हरिप्रताप शाही को पंचायती राज का डायरेक्टर बनाया गया है। राकेश कुमार सिंह को हाउसिंग डेवलपमेंट काउंसिल का एडिशनल कमिश्नर नियुक्त किया गया है।
इसके अलावा, प्रशासन ने कुछ अन्य अधिकारियों की तैनाती भी की है, जिनमें शामिल हैं:
- ध्रुव खडिया को मऊ का चीफ डेवलपमेंट ऑफिसर (CDO) बनाया गया है।
- नीरज शुक्ला को PCDF का मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया है।
- डॉ. चंद्र भूषण को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी में एडिशनल डायरेक्टर बनाया गया है।
- रीना सिंह को किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी का रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया है।
पिछले दिनों हुए तबादलों का सिलसिला
प्रशासनिक फेरबदल का यह सिलसिला पिछले कुछ दिनों से लगातार जारी है। 28 सितंबर 2026 को तीन IPS अधिकारियों के तबादले किए गए थे, जिसमें मनोज कुमार को PAC वेस्टर्न ज़ोन का IG और राजेश द्विवेदी को लखनऊ स्थित पुलिस हेडक्वार्टर के इलेक्शन सेल का SP बनाया गया था।
इससे पहले 21 और 22 सितंबर के बीच सरकार ने 34 IAS अधिकारियों के कार्यक्षेत्र बदले थे। इनमें कानपुर नगर, हरदोई, मुरादाबाद और इटावा जैसे 14 जिलों के जिलाधिकारियों (DM) के नाम शामिल थे। इसी दौरान 18 IPS अधिकारियों का भी तबादला किया गया था।
14 सितंबर को भी एक बड़ा बदलाव देखा गया था, जब 14 IAS और 34 PCS अधिकारियों को इधर-उधर किया गया। इस बदलाव का असर सहारनपुर, लखीमपुर खीरी और अंबेडकर नगर के CDOs पर पड़ा था।
चुनाव आयोग के दिशा-निर्देश और प्रशासनिक रणनीति
विश्लेषकों का मानना है कि इन तबादलों को एक तरह की प्रशासनिक घेराबंदी के रूप में देखा जा रहा है, ताकि चुनाव से पहले सरकारी मशीनरी को और मजबूत किया जा सके।
इन तबादलों की जांच भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के दिशा-निर्देशों के संदर्भ में की जा रही है। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार अधिकारी अपने गृह जिले में तैनात नहीं रह सकते।
साथ ही, निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए यह नियम है कि कोई भी अधिकारी चार साल की अवधि में तीन साल से अधिक समय तक एक ही पद पर नहीं रह सकता। हालांकि राज्य सरकारें अक्सर इन प्रशासनिक फैसलों में चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र को लेकर बहस करती हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में चुनाव पूर्व शासन का यह एक अहम हिस्सा बना हुआ है।

























