पश्चिम बंगाल के मंत्री और भाजपा नेता दिलीप घोष ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने विपक्षी दलों द्वारा ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की जो मांग की जा रही है, उसे पूरी तरह खारिज कर दिया है।
राजनीतिक टकराव के बीच दिलीप घोष ने स्पष्ट कहा कि किसी भी व्यक्ति के पास ज्ञानेश कुमार को उनके संवैधानिक पद से हटाने का अधिकार नहीं है। उन्होंने विपक्ष द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों को केवल एक ‘पब्लिसिटी कैंपेन’ यानी प्रचार अभियान करार दिया है।
यह पूरा विवाद चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के डीप स्पेशल रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया को लेकर शुरू हुआ है। इसी मुद्दे पर INDIA गठबंधन ने 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर 2026 तक देशव्यापी ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ निकालने का ऐलान किया है।
विपक्ष का आंदोलन और गंभीर आरोप
INDIA गठबंधन के तहत विपक्षी दल 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग के मुख्यालय तक मार्च निकालेंगे। इसके बाद यह गठबंधन अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करने की कोशिश करेगा।
राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि CEC चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को कम कर रहे हैं और चुनावी नतीजों में हेरफेर कर रहे हैं।
दिलीप घोष के पलटवार और तारीखवार दावे
दिलीप घोष सितंबर के अंत और अक्टूबर की शुरुआत में इन आरोपों का कड़ा जवाब दे रहे हैं। उन्होंने अलग-अलग तारीखों पर विपक्ष के दावों को चुनौती दी है:
- 24 सितंबर 2026 को उन्होंने राहुल गांधी को चुनौती दी कि वे CEC की गिरफ्तारी की मांग के संबंध में सबूत पेश करें।
- 25 सितंबर तक उन्होंने विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की साजिश रचने का आरोप लगाया।
- 27 सितंबर को उन्होंने कहा कि कुमार के खिलाफ हो रही चर्चा अब ठोस बहस के बजाय केवल राजनीति बनकर रह गई है।
- 30 सितंबर को घोष ने याद दिलाया कि इसी चुनाव आयोग के समय पिछले चुनाव हुए थे जिनमें कांग्रेस पार्टी विजयी हुई थी।
1 अक्टूबर को दिलीप घोष ने INDIA गठबंधन के नेतृत्व और उनकी एकता पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि इस गठबंधन में भाजपा को हराने की सामूहिक ताकत नहीं है।
उत्तर प्रदेश के मंत्री का समर्थन और आंकड़ों का तर्क
2 अक्टूबर को दिलीप घोष ने अपने स्टैंड को दोहराया और उनके साथ उत्तर प्रदेश के मंत्री ओम प्रकाश राजभर भी थे। राजभर ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का समर्थन किया।
ओम प्रकाश राजभर ने तर्क दिया कि चुनाव में चोरी के विपक्षी आरोप पूरी तरह अतार्किक हैं। उन्होंने कहा कि अगर वास्तव में ऐसी हेरफेर हुई होती, तो भाजपा की संसदीय सीटों की संख्या 303 से घटकर 240 नहीं होती।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपनी स्थिति साफ रखी है। आयोग का कहना है कि डीप स्पेशल रिवीजन (SIR) प्रक्रिया समेत सभी फैसले आम सहमति से लिए गए थे।

























