शाहजहांपुर जिले के जललाबाद ब्लॉक के विकास खंड अधिकारी (BDO) पर वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं। यह पूरा मामला मुडिया कलां ग्राम पंचायत से जुड़ा है, जहां पैसों के लेन-देन में गड़बड़ी की बात सामने आई है।
इस मामले में मुडिया कलां ग्राम पंचायत में एक दूसरा वाउचर मिला है, जो विवादों के घेरे में है। बताया जा रहा है कि इस वाउचर पर न तो कोई तारीख लिखी है और न ही इसमें पैसे पाने वाले व्यक्ति का नाम दर्ज है।
हैरानी की बात यह है कि इस दस्तावेज में संबंधित ग्राम पंचायत का नाम भी नहीं लिखा गया है। इन कमियों की वजह से अब इस पूरे वित्तीय लेन-देन पर सवाल उठ रहे हैं।
दस्तावेजों में गंभीर खामियां और सोशल मीडिया पर चर्चा
सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर काफी चर्चा हो रही है। 30 सितंबर 2026 के आसपास पोस्ट किए गए संदेशों में इन दस्तावेजों की असलियत पर सवाल उठाए गए हैं। कुछ लोगों ने इन कागजातों को पूरी तरह से फर्जी करार दिया है।
आलोचकों ने इस बात की ओर इशारा किया है कि जिस वाउचर को सिर्फ एक “इनवॉइस” कहा गया है, उसमें जरूरी जानकारियां गायब हैं। इस दस्तावेज में निम्नलिखित चीजों की कमी पाई गई है:
- दस्तावेज में कोई HSN कोड नहीं दिया गया है।
- इसमें किसी पार्टी का नाम नहीं लिखा है।
- वाउचर पर कोई वैध GST नंबर मौजूद नहीं है।
इन सभी गंभीर शिकायतों और आरोपों को जांच के लिए शाहजहांपुर के मुख्य विकास अधिकारी (CDO) के कार्यालय में भेजा गया है।
जललाबाद ब्लॉक में भ्रष्टाचार के पुराने मामले
जललाबाद विकास खंड में वित्तीय गड़बड़ियों की शिकायतें काफी पुरानी हैं। स्थानीय लोगों ने पहले भी यहाँ भ्रष्टाचार और गलत तरीके से पैसे खर्च करने की शिकायतें दर्ज कराई हैं। इससे पहले भी यहाँ फर्जी बिल बनाने और करोड़ों रुपये के घोटाले के दावे किए गए थे।
इन पुराने घोटालों में मुख्य रूप से हैंडपंप री-बोरिंग प्रोजेक्ट्स से जुड़े मामले शामिल रहे हैं, जिनमें भारी वित्तीय हेराफेरी की बात कही गई थी। अब मुडिया कलां का यह नया मामला उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।
इतने सारे गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक जिला प्रशासन की तरफ से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। प्रशासन ने अभी तक इस मामले में किसी भी तरह की जांच शुरू करने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

























