उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (SP) के प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने दावा किया है कि भारतीय संविधान खतरे में नहीं है, बल्कि अखिलेश यादव खुद राजनीतिक संकट में घिरे हुए हैं।
यह बयान ओम प्रकाश राजभर ने 2 अक्टूबर, 2026 को अंबेडकर नगर में दिया। उन्होंने अखिलेश यादव के उन दावों को खारिज कर दिया जिनमें कहा जाता है कि संविधान खतरे में है। राजभर के मुताबिक, अखिलेश यादव साल 2017 से इसी तरह की बातें दोहरा रहे हैं।
राजभर ने जोर देकर कहा कि संविधान पूरी तरह सुरक्षित है, जबकि अखिलेश यादव को अपनी राजनीतिक मौजूदगी के लिए खतरा महसूस करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव अब यह समझ चुके हैं कि उनकी पार्टी दोबारा सत्ता में नहीं आएगी, इसलिए वे केवल अपने निजी हितों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
समाजवादी पार्टी और पीडीए फॉर्मूले पर हमला
ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी की तुलना एक डूबते हुए जहाज से की। उन्होंने कहा कि इस जहाज में सवार पार्टी सदस्य अब काफी कष्ट झेल रहे हैं। अखिलेश यादव ने हाल के राजनीतिक मुकाबलों को भाईचारे के चुनाव बताया था, जिस पर राजभर ने पलटवार किया।
राजभर ने इन मुकाबलों को भाईचारे के बजाय दौलत के चुनाव करार दिया। उन्होंने समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) ढांचे की भी कड़ी आलोचना की। राजभर का आरोप है कि इस ढांचे में केवल परिवारवाद का बोलबाला है।
उन्होंने विशेष रूप से राम गोपाल यादव का नाम लिया और कहा कि पार्टी में परिवारवाद हावी है। राजभर ने यह भी दावा किया कि पार्टी ने अभी तक उन उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है जो अपराधी हैं।
SBSP और सपा के रिश्तों पर स्पष्ट रुख
अपने राजनीतिक रुख को स्पष्ट करते हुए राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने उन्हें असल में तलाक दे दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कह दिया कि उन्होंने इस अलगाव को पूरी तरह स्वीकार कर लिया है। राजभर ने भविष्य में किसी भी तरह के समझौते की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर उन्हें 50 सीटें भी ऑफर की जाएं, तब भी वे समाजवादी पार्टी में वापस नहीं लौटेंगे। राजभर ने पार्टी से दूरी बनाने के मुख्य कारणों के बारे में विस्तार से बताया।
- पार्टी में कार्यकर्ताओं के प्रति सम्मान की भारी कमी है।
- पार्टी में केवल अमीर लोगों का प्रभाव बढ़ गया है।
- पार्टी के भीतर परिवारवादी हितों का दबदबा है।
अखिलेश यादव के संदेश और आगामी चुनाव
यह पूरा विवाद 2 अक्टूबर, 2026 को अखिलेश यादव द्वारा दिए गए बयानों के बाद शुरू हुआ। यादव के उन बयानों को नाराज नेताओं के लिए एक अप्रत्यक्ष संदेश के रूप में देखा गया था। उन्होंने सुझाव दिया था कि राज्यसभा चुनाव का समय एकता का समय होता है।
अखिलेश यादव ने उन लोगों से एकजुट होने की अपील की थी, जिन्हें लगता है कि लोकतंत्र और संविधान पर हमला हो रहा है। 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक जोड़-तोड़ तेज हो गई है, जिसके चलते दोनों नेताओं के बीच यह जुबानी जंग छिड़ी हुई है।

























