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अखिलेश यादव ने फिर उठाई जाति जनगणना की मांग, यूपी में सरकार आने पर 3 महीने में कराएंगे गिनती

Samajwadi Party के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने जाति आधारित जनगणना कराने की अपनी पार्टी की प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जब तक ऐसा डेटा उपलब्ध नहीं होगा, तब तक समाज में सामाजिक न्याय हासिल करना नामुमकिन है।

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Akhilesh Yadav ने इस मांग को अपने राजनीतिक एजेंडे का मुख्य हिस्सा बनाया है। उन्होंने घोषणा की है कि यदि Uttar Pradesh में Samajwadi Party की सरकार बनती है, तो तीन महीने के भीतर जाति जनगणना पूरी कर ली जाएगी।

उनका दावा है कि इस जनगणना के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हर समुदाय को उनकी आबादी के अनुपात में उचित अधिकार और हक मिल सकें।

2027 चुनाव के लिए Plan Caste 41 की तैयारी

2027 के Uttar Pradesh विधानसभा चुनाव से पहले Samajwadi Party ने रणनीतिक तौर पर ‘Plan Caste 41’ की शुरुआत की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के 41 अलग-अलग जाति समूहों के बीच अपना समर्थन जुटाना और उन्हें एकजुट करना है।

इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए पार्टी अब सभी विधानसभा क्षेत्रों में बूथ स्तर पर खुद का जातिगत डेटा इकट्ठा कर रही है। यह पूरी प्रक्रिया जमीनी स्तर पर संचालित की जा रही है।

इस पहल के जरिए पार्टी निम्नलिखित उद्देश्यों को पूरा करना चाहती है:

  • विभिन्न क्षेत्रों की जनसांख्यिकीय संरचना की पहचान करना।
  • स्थानीय स्तर पर मौजूद जातिगत और सामाजिक मुद्दों को समझना।
  • भविष्य की चुनावी रणनीतियों के लिए एक ठोस आधार तैयार करना।
  • उम्मीदवारों के चयन और सीट शेयरिंग समझौतों में मदद लेना।

केंद्र सरकार की जनगणना प्रक्रिया पर उठाए सवाल

Akhilesh Yadav ने केंद्र सरकार द्वारा जारी हालिया जनगणना नोटिफिकेशन्स की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इस पूरे नजरिए को एक ‘जुमला’ यानी खाली वादा करार दिया है।

उनका कहना है कि वर्तमान जनगणना फॉर्म में जाति के लिए कोई अलग कॉलम नहीं रखा गया है, जिससे यह पूरी कवायद बेअसर हो जाती है। उन्होंने इसे ‘PDA’ (Pichda, Dalit, Alpsankhyak) समुदाय के खिलाफ एक बड़ी साजिश बताया है।

हालांकि केंद्रीय अधिकारियों ने यह संकेत दिया है कि जनगणना दो चरणों में होती है, जिसमें पहले घरों की लिस्टिंग की जाती है और उसके बाद जाति से संबंधित पूछताछ हो सकती है। इसके बावजूद Akhilesh Yadav का मानना है कि मौजूदा प्रशासन से पारदर्शी जाति गणना की उम्मीद करना पूरी तरह अर्थहीन है।

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