Jio Platforms Limited ने बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर अपनी बाजार में एंट्री की। रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल सेवाओं वाली इस कंपनी का शेयर 1,358 रुपये पर खुला, जो कि इसके आईपीओ प्राइस 1,119 रुपये से 21.36 प्रतिशत ज्यादा था।
इस लिस्टिंग के बाद कंपनी की वैल्यू लगभग 12.5 लाख करोड़ रुपये या 132 बिलियन डॉलर हो गई है। एक्सचेंज डेटा और The Hindu की रिपोर्ट के मुताबिक, इस वैल्यूएशन ने इस कंपनी को भारत की दूसरी सबसे मूल्यवान लिस्टेड कंपनी बना दिया है, जो सिर्फ अपनी पैरेंट कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाद है और भारती एयरटेल को पीछे छोड़ चुकी है।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में घंटी बजाने के मौके पर मुकेश अंबानी और उनका परिवार, जिसमें नीता, आकाश, ईशा और अनंत शामिल थे, मौजूद रहे। रिलायंस ग्रुप की तरफ से दो दशकों में यह पहली पब्लिक लिस्टिंग है। यह एक बड़े बदलाव का संकेत है क्योंकि प्रमोटर अब उस डिजिटल इंजन से वैल्यू निकाल रहे हैं जिसने 2016 के बाद भारतीय टेलीकॉम को बदल दिया था।
निवेशकों का उत्साह और सब्सक्रिप्शन का रिकॉर्ड
पब्लिक ऑफरिंग विंडो के दौरान निवेशकों ने 4.9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रिकॉर्ड बोलियां लगाईं। Business Standard और Livemint की रिपोर्ट के अनुसार, एंकर बुक को मिलाकर कुल डिमांड 7.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
इस पब्लिक इश्यू के लिए 1.35 करोड़ से ज्यादा आवेदन आए, जिससे यह दुनिया का पहला ऐसा आईपीओ बन गया जिसने एक करोड़ आवेदनों का आंकड़ा पार किया। सब्सक्रिप्शन अवधि के दौरान अलग-अलग कैटेगरी के निवेशकों की भागीदारी काफी अधिक रही:
- क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर कैटेगरी 70.55 गुना सब्सक्राइब हुई।
- नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर हिस्सा 14 गुना सब्सक्राइब हुआ।
- रिटेल आवेदकों ने 2.72 गुना सब्सक्रिप्शन लिया।
- रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों ने 7.60 गुना और कर्मचारियों ने 2.93 गुना सब्सक्रिप्शन लिया।
कंपनी बाजार में मजबूत स्थिति में है और इसके 500 मिलियन से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं। रिलायंस जियो इन्फोकॉम, जो कुल रेवेन्यू के करीब 88 प्रतिशत और EBITDA के 94 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार है, ने एक बड़ा 5G नेटवर्क खड़ा किया है। वित्त वर्ष 2026 के नतीजों में ऑपरेशंस से रेवेन्यू 1,46,885 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 14.6 प्रतिशत ज्यादा है, जबकि टैक्स के बाद मुनाफा 30,049 करोड़ रुपये रहा।
वित्तीय जोखिम और बाजार की चुनौतियां
रिलायंस ग्रुप का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन अब 30 लाख करोड़ रुपये पार कर गया है, जिसने टाटा ग्रुप को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, नोमुरा और एलारा जैसी ब्रोकरेज फर्मों के विश्लेषकों का कहना है कि परफॉर्मेंस भविष्य में प्रति यूजर औसत राजस्व (ARPU) की ग्रोथ और AI व 5G सेवाओं से कमाई पर निर्भर करेगी।
यहाँ हाई कंसंट्रेशन रिस्क है क्योंकि कंसोलिडेटेड रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा टेलीकॉम सब्सिडियरी से आता है। घरेलू बाजार में भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसी कंपनियों से मुकाबला जारी है। रॉयटर्स के मुताबिक, लिस्टिंग प्राइस पर शेयर खरीदने वाले निवेशकों को जोखिम हो सकता है यदि टैरिफ बढ़ोतरी या डिजिटल मोनेटाइजेशन की कोशिशें उम्मीद के मुताबिक नहीं रहीं।
3 प्रतिशत से कम का लो फ्री फ्लो शॉर्ट टर्म में शेयर प्राइस को सपोर्ट कर सकता है, लेकिन इसका मतलब मार्केट लिक्विडिटी का सीमित होना भी है। आने वाली ट्रेडिंग से पता चलेगा कि बाजार आधिकारिक वैल्यूएशन के साथ कैसे तालमेल बिठाता है। निवेशक अब अगली तिमाही के नतीजों और स्पेक्ट्रम व डेटा टैरिफ से जुड़े रेगुलेटरी घटनाक्रमों पर नजर रखेंगे। जैसे-जैसे कंपनी एक प्राइवेट खिलाड़ी से पब्लिक एंटिटी बनेगी, डिजिटल और AI ग्रोथ रणनीतियों पर मैनेजमेंट की बातें निवेशकों के सेंटिमेंट को गाइड करेंगी।









