दिल्ली की ओखला विधानसभा सीट के दो पोलिंग बूथों की वोटर लिस्ट में बड़ी गड़बड़ी पाई गई है। एक पब्लिक ऑडिट के दौरान यहाँ 100 से ज्यादा मतदाताओं को गलत तरीके से मार्क किया गया है।
यह मामला Election Commission of India की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन प्रक्रिया के दौरान सामने आया है। इस ऑडिट से पता चला है कि वोटर लिस्ट को अपडेट करने में कई गंभीर चुनौतियां आ रही हैं।
The Hindu Morning Digest ने 19 अक्टूबर 2026 को अपनी रिपोर्ट में बताया कि यह पूरी जांच स्वयंसेवकों द्वारा की गई थी। इन वॉलंटियर्स ने अक्टूबर के मध्य में सात दिनों तक ओखला के 258 घरों का सर्वे किया और यह ऑडिट पूरा किया।
वोटर लिस्ट में गलत वर्गीकरण का असर
इस सर्वे में यह बात सामने आई कि बहुत से लोगों को गलत तरीके से अनुपस्थित, शिफ्टेड, मृत या डुप्लीकेट श्रेणी में डाल दिया गया था। इन गलतियों को सामूहिक रूप से ASDD एंट्रीज कहा जाता है।
किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के सही ढंग से काम करने के लिए वोटर लिस्ट की सटीकता सबसे बुनियादी जरूरत होती है। अगर इन सूचियों में गलतियां होती हैं, तो असली मतदाताओं का वोट डालने का अधिकार छिन सकता है।
साथ ही, ऐसी गलतियों की वजह से चुनावी अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी बढ़ जाते हैं। सिविल सोसाइटी के सदस्यों का कहना है कि घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में सरकारी प्रक्रियाएं कभी-कभी चूक जाती हैं, इसलिए स्वतंत्र ऑडिट जरूरी हैं।
रिविजन प्रक्रिया और राजनीतिक चिंताएं
यह पूरा वेरिफिकेशन प्रोसेस ऐसे समय में हो रहा है जब स्पेशल इंटेंसिव रिविजन को लेकर बहस चल रही है। कई राजनीतिक दलों, खासकर विपक्षी दलों ने इस दौरान वोटर लिस्ट की ईमानदारी पर सवाल उठाए हैं।
The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार, इन विसंगतियों ने Election Commission of India द्वारा अपनाई गई रिविजन पद्धति की सटीकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब नागरिकों को पता चलता है कि उनका नाम गलत तरीके से हटा दिया गया है, तो उन्हें खुद अपनी पात्रता साबित करनी पड़ती है।
पारदर्शिता की बात करने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि कमीशन भले ही सटीकता के उच्च मानक चाहता हो, लेकिन जमीनी स्तर पर इन बदलावों को लागू करने में लॉजिस्टिक दिक्कतें आती हैं। ओखला जैसे इलाकों के निवासी अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए इन्हीं सूचियों पर निर्भर हैं।
सत्यापन के लिए आगे के कदम
अगर इस तरह की गलतियां बड़े पैमाने पर पाई जाती हैं, तो वोटर लिस्ट रिविजन की पूरी साख पर असर पड़ सकता है। इस स्थिति के कारण अब दिल्ली के अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में भी अतिरिक्त ऑडिट कराने का दबाव बढ़ सकता है।
प्रभावित मतदाता अब Election Commission के औपचारिक जवाब का इंतजार कर रहे हैं। वे जानना चाहते हैं कि वोटर लिस्ट फाइनल होने से पहले इन विशिष्ट गलतियों को कैसे सुधारा जाएगा।
रिविजन के अगले चरणों में विसंगतियों को दूर करने के लिए दावों और आपत्तियों को दर्ज करने की एक समर्पित अवधि शामिल होने की संभावना है। अधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए आगे का सत्यापन करेंगे कि अंतिम वोटर लिस्ट में केवल सटीक डेटा ही रहे।

























