भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता आधिकारिक तौर पर आज 20 अक्टूबर 2026 से लागू हो गया है। इस महत्वपूर्ण समझौते के तहत अब लागू होने के दिन से ही न्यूजीलैंड के बाजार में सभी भारतीय निर्यात के लिए पूरी तरह से ड्यूटी फ्री एक्सेस की सुविधा मिलेगी।
इस साझेदारी की शुरुआत की घोषणा वाणिज्य और उद्योग मंत्री Piyush Goyal और न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री Todd McClay ने संयुक्त रूप से की। यह समझौता उन लंबी बातचीत का नतीजा है जो मार्च 2025 में शुरू हुई थीं और दिसंबर 2025 में पूरी हुई थीं।
दोनों देशों ने 27 अप्रैल 2026 को इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद अब विजय दशमी के त्योहार के अवसर पर इसे正式 रूप से लॉन्च कर दिया गया है।
व्यापार और निवेश के लक्ष्यों में विस्तार
Press Information Bureau के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, यह डील भारतीय सामानों की सभी टैरिफ लाइनों को कवर करती है। इस कदम से उन पीक टैरिफ को हटा दिया गया है जो पहले 10 प्रतिशत तक पहुंच जाते थे।
भारत ने भी इसके बदले में 70 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर छूट दी है। यह छूट दोनों देशों के बीच वर्तमान व्यापार मूल्य के 95 प्रतिशत हिस्से को कवर करती है।
The Indian Express, Livemint, The Financial Express और CNBC TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, इसका मुख्य लक्ष्य द्विपक्षीय व्यापार को लगभग 2.4 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 7 बिलियन न्यूजीलैंड डॉलर करना है।
न्यूजीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में 20 बिलियन डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को सुविधाजनक बनाने की औपचारिक प्रतिबद्धता भी जताई है। निवेश का यह प्रयास Make in India पहल को समर्थन देने के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर में विकास को बढ़ावा देने के लिए है।
संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा और रोजगार के अवसर
BusinessToday और Moneycontrol की कवरेज में विश्लेषकों ने बताया कि डेयरी, प्याज और चने जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को बाहर रखकर इस समझौते को संतुलित रखा गया है। श्रमिक प्रधान क्षेत्रों के भारतीय निर्यातकों को इस विकास से सबसे अधिक लाभ होगा।
इन लाभान्वित होने वाले उद्योगों में मुख्य रूप से शामिल हैं:
- टेक्सटाइल (कपड़ा उद्योग)
- Apparel (परिधान)
- चमड़ा (Leather)
- Footwear (जूते)
- रत्न और आभूषण (Gems and Jewellery)
यह समझौता प्रोफेशनल्स के लिए विशेष रास्ते खोलता है, जिसके तहत 5,000 अस्थायी रोजगार एंट्री वीजा और 1,000 वर्किंग हॉलिडे वीजा दिए जाएंगे। भारतीय छात्रों को भी लाभ मिलेगा, जिन्हें STEM और PhD योग्यता हासिल करने के बाद चार साल तक के पोस्ट स्टडी वर्क राइट्स मिलेंगे।
बाजार पहुंच और घरेलू किसानों का संरक्षण
जहाँ भारतीय सामानों को नई आजादी मिली है, वहीं न्यूजीलैंड के उत्पादकों के लिए समझौते में विशिष्ट कोटा व्यवस्था शामिल की गई है। न्यूजीलैंड के सेबों पर 25 प्रतिशत ड्यूटी लगेगी और इनका कोटा 35,000 से बढ़ाकर 45,000 मीट्रिक टन किया गया है।
कीवीफ्रूट 1.80 डॉलर प्रति किलोग्राम की सीमा से ऊपर शून्य ड्यूटी के साथ प्रवेश करेगा। इसके अलावा, Manuka honey को भी विशिष्ट और विनियमित कोटा के तहत प्रवेश मिलेगा।
The Economic Times द्वारा उद्धृत विशेषज्ञों का कहना है कि ये प्रावधान प्रभावी रूप से भारत के घरेलू किसानों की रक्षा करते हैं। यह डील भारत के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है क्योंकि चीन को छोड़कर Regional Comprehensive Economic Partnership के हर सदस्य के साथ भारत ने मुक्त व्यापार समझौते पूरे कर लिए हैं।
इन संबंधों को मजबूत करने से भारत को अपने निर्यात में विविधता लाने और वैश्विक सप्लाई चेन में बदलावों को संभालने में मदद मिलेगी। यह समझौता इंडो पैसिफिक क्षेत्र में जुड़ाव के लिए एक रणनीतिक स्तंभ के रूप में काम करेगा।
अधिकारी अब इस संधि के कार्यान्वयन चरण पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। भविष्य के प्रयासों में निर्यात वृद्धि की निगरानी करना और यह सुनिश्चित करना शामिल होगा कि दोनों पक्षों के व्यवसायों के लिए कस्टम प्रक्रियाएं कुशल रहें।
अधिकारी सेवाओं में गहरे सहयोग और नियोजित निवेशों के दीर्घकालिक एहसास के संबंध में चर्चा जारी रखेंगे। टैरिफ रेट कोटा के प्रदर्शन की ट्रैकिंग से घरेलू कृषि कारकों के आधार पर किसी भी आवश्यक समायोजन का निर्धारण किया जाएगा।

























