लखनऊ जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष विजय बहादुर यादव द्वारा वर्तमान प्रशासन में प्रभाव डालने को लेकर चिंताएं जताई गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यादव को अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठकर निर्देश जारी करते देखा गया है, जिससे वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष आरती रावत की भूमिका पर असर पड़ा है।
आरती रावत ने विजय बहादुर यादव के भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े रहने के दौरान उनके राजनीतिक समर्थन से अध्यक्ष पद हासिल किया था। हालांकि, जुलाई 2024 में यादव के समाजवादी पार्टी में वापस लौटने के बाद राजनीतिक समीकरण बदल गए, जिससे ऑफिस में उनकी मौजूदगी और अधिकार को लेकर प्रशासनिक टकराव और जांच शुरू हो गई है।
भ्रष्टाचार और संपत्ति की जांच का मामला
यह स्थिति इसलिए और जटिल हो गई है क्योंकि सरकार ने यादव और रावत दोनों के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। इन जांचों में गंभीर आरोप शामिल हैं, जिनमें सरकारी टेंडरों में वित्तीय अनियमितताएं, जमीन अधिग्रहण विवाद और आय से अधिक संपत्ति जमा करना शामिल है।
स्थानीय मीडिया और पर्यवेक्षक इन घटनाक्रमों पर नजर रख रहे हैं। लखनऊ में ऑफिस के भीतर यादव की सक्रिय भूमिका राजनीतिक विवाद का मुद्दा बन गई है, जो जिला पंचायत के आधिकारिक शासन ढांचे के लिए एक चुनौती है।









