लखनऊ पुलिस और क्राइम ब्रांच ने 1.5 करोड़ रुपये की बड़ी लूट की गुत्थी सुलझा ली है। जांच में पता चला है कि यह पूरी वारदात गुजरात के एक कारोबारी के कर्मचारी द्वारा रची गई एक सोची-समझी साजिश थी।
हवाला फंड की इस चोरी का खुलासा अशियाना पुलिस स्टेशन और स्थानीय क्राइम यूनिट की संयुक्त जांच के बाद हुआ, जिसकी औपचारिक जानकारी 6 नवंबर 2026 को दी गई। इस साजिश का नेतृत्व कारोबारी कमलेश के कर्मचारी प्रज्ञेश कुमार ने किया था।
झूठी रिपोर्ट और पुलिस जांच
24 अक्टूबर को प्रज्ञेश ने पुलिस को सूचना दी थी कि अशियाना के औरंगाबाद अंडरपास के पास बाइक सवार बदमाशों ने उसे लूट लिया है। इस रिपोर्ट के आधार पर 25 अक्टूबर को अशियाना पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई थी।
हालांकि, डीसीपी सेंट्रल अर्पित विजयवर्गीय के नेतृत्व में हुई जांच, CCTV फुटेज और तकनीकी सबूतों ने शुरुआती दावे को झूठा साबित कर दिया। पूछताछ के दौरान प्रज्ञेश ने अपने साथियों के साथ मिलकर लूट की साजिश रचने की बात कबूल की।
गिरफ्तारियां और बरामद सामान
पुलिस ने इस अपराध के सिलसिले में कुल पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इनमें से सुमित यादव और सत्यम नाम के दो लोगों को लखनऊ से पकड़ा गया, जबकि प्रज्ञेश और दो अन्य आरोपियों को गुजरात से गिरफ्तार किया गया।
- पुलिस ने चोरी की राशि में से 1.23 करोड़ रुपये बरामद कर लिए हैं।
- एक XUV गाड़ी और दो मोटरसाइकिलें जब्त की गई हैं, जिनमें से एक अपराध में इस्तेमाल हुई थी और दूसरी चोरी के पैसों से खरीदी गई थी।
- एक आईफोन, जिंदा कारतूसों के साथ एक हथियार और एक सोने का सिक्का भी बरामद हुआ है।
जांच में यह पुष्टि हुई कि हवाला फंड को हड़पने के लिए पूरी घटना को फर्जी तरीके से रचा गया था।









