उत्तर प्रदेश में दिवाली और भाई दूज के त्योहारी सीजन के दौरान Food Safety and Drug Administration (FSDA) की प्रवर्तन कोशिशों के दायरे और प्रभाव को लेकर आलोचना हो रही है। विभाग ने खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘Shuddh Hi Shubh Hai’ अभियान शुरू किया है, लेकिन जानकारों ने सवाल उठाया है कि FIR जैसी बड़ी दंडात्मक कार्रवाइयां केवल छोटे विक्रेताओं पर क्यों केंद्रित हैं, जबकि बड़े व्यवसायों के लिए केवल रूटीन सैंपलिंग की जा रही है।
त्योहारों से पहले के एक हफ्ते के आंकड़ों के अनुसार, FSDA की टीमों ने राज्य भर में 1,133 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया और 935 खाद्य नमूने इकट्ठे किए। कुल 54 से 60 क्विंटल असुरक्षित खाद्य उत्पाद, जिनमें दूध, पनीर और खोया शामिल हैं, जब्त कर नष्ट कर दिए गए, जिनकी अनुमानित कीमत 1.32 करोड़ रुपये से अधिक है।
दंडात्मक कार्रवाई और प्रशासनिक तुलना
गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर अधिकारियों ने 27 से 32 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। मुख्य रूप से खतरनाक रसायनों के उपयोग से जुड़े मामलों में मुरादाबाद, बुलंदशहर और मथुरा जैसे विशिष्ट जिलों में सीमित FIR दर्ज की गई हैं। इसके बावजूद, आलोचकों का तर्क है कि विभाग की यह गतिविधि काफी हद तक दिखावटी और मौसमी है।
महाराष्ट्र FDA कमिश्नर Tukaram Mundhe की पारदर्शी और सख्त प्रशासनिक शैली से तुलना करते हुए विरोधियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश के अधिकारियों में बड़े मिलावटखोरों को जवाबदेह ठहराने के लिए जरूरी निर्णायकता की कमी है।
दुकानों और यूनिट्स के लिए निर्देश
FSDA ने मिठाई की दुकानों, गोदामों और विनिर्माण इकाइयों के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं, जिसमें फर्श की मरम्मत और शौचालय के रखरखाव सहित स्वच्छता स्थितियों में सुधार करना शामिल है। एजेंसी ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
- Rhodamine-B जैसे प्रतिबंधित खाद्य रंग एजेंटों के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है।
- बिना वैध लाइसेंस के चल रही यूनिट्स को बंद करने का आदेश दिया गया है।
इसके बावजूद, प्रवर्तन में दिखने वाले अंतर को लेकर सार्वजनिक चर्चा जारी है और हितधारक तत्काल त्योहारी अवधि के बाद भी निरंतर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।









