सामाजिक संगठन Save Waqf India ने अल्पसंख्यक कल्याण और वक्फ विभाग के प्रमुख सचिव को एक विस्तृत शिकायत सौंपी है। संगठन ने आगरा, बहराइच, बाराबंकी और लखनऊ में शिया वक्फ संपत्तियों में वित्तीय अनियमितताओं, अवैध निर्माण और प्रशासनिक कुप्रबंधन के आरोपों की उच्च स्तरीय SIT जांच की मांग की है।
संगठन के प्रवक्ता मौलाना इफ्तिखार हुसैन इंकलाबी ने उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अकाउंटेंट सैयद आबिद रजा की नियुक्ति और उनकी भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
विभिन्न शहरों में संपत्तियों की गड़बड़ी के आरोप
आगरा में शिकायत मज़ार-ए-शहीद-ए-सालिस (वक्फ रजिस्ट्रेशन नंबर I-16) को लेकर है। 16 अक्टूबर 2025 को CEO ज़ीशान रिज़वी के आदेश पर इस संपत्ति को बोर्ड के सीधे नियंत्रण में रखकर ज़फ़र सज्जाद को प्रशासक नियुक्त किया गया था और आबिद रजा को सभी रिकॉर्ड सौंपने के निर्देश दिए गए थे। संगठन ने रजा के कार्यकाल का पूरा वित्तीय और प्रशासनिक ऑडिट करने की मांग की है।
बहराइच के बशीरगंज कर्बला में नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण का मामला है। शिकायत में कहा गया है कि जमीन की कीमत करीब 130 करोड़ रुपये है, लेकिन अधिग्रहित सटीक क्षेत्र, मुआवजे की राशि और फंड कहाँ गया, यह स्पष्ट नहीं है। संगठन ने तत्काल सीमांकन और सत्यापन की मांग की है।
बाराबंकी में पुराने निबलेट स्कूल के पास और रेमंड शोरूम के सामने वक्फ नवाब अमजद अली खान की संपत्ति में अनधिकृत निर्माण और प्रशासनिक हस्तक्षेप का आरोप लगाया गया है। लखनऊ में अब्बास बाग कर्बला संपत्तियों के संबंध में भी अवैध कब्जे और जमीन की बिक्री की शिकायत की गई है।
नियुक्ति और सुरक्षा संबंधी जांच की मांग
संगठन ने सरकार से सैयद आबिद रजा की भर्ती की जांच करने का अनुरोध किया है, क्योंकि उनकी नियुक्ति पूर्व अध्यक्ष वसीम रिज़वी के कार्यकाल में हुई थी। इसके अलावा, आसफी मस्जिद और मौलाना डॉ. सैयद कल्बे जवाद नकवी से जुड़े एक पुराने मामले का जिक्र किया गया है, जिसमें रजा का नाम पुलिस मामले में आया था। संगठन ने संबंधित FIR और रिकॉर्ड की समीक्षा करने को कहा है।
साथ ही, 13 अक्टूबर को मौलाना कल्बे जवाद नकवी पर हुए हमले की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। Save Waqf India ने सरकार को 17 सूत्रीय मांगों की सूची सौंपी है, जिसमें शामिल हैं:
- वक्फ बैंक खातों का विशेष ऑडिट।
- कमेटी गठन की कानूनी जांच।
- अनधिकृत संपत्ति हस्तांतरण पर रोक।
इस शिकायत की प्रतियां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री, शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के CEO, बाराबंकी और बहराइच के जिला अधिकारियों और अयोध्या मंडल आयुक्त को भेजी गई हैं।









