बाराबंकी के रामनगर में पुरानी तहसील परिसर में आयोजित श्री राम कथा बुधवार को संपन्न हुई। इस अवसर पर कथावाचक अतुल कृष्ण भारद्वाज महाराज ने अंतिम संबोधन दिया।
समापन सत्र के दौरान रामायण की प्रमुख घटनाओं का भावुक वर्णन किया गया, जिसमें सीता माता का अपहरण, लंका दहन, भगवान राम और रावण के बीच युद्ध, विभीषण का राज्याभिषेक और भगवान राम की अयोध्या वापसी शामिल थी।
जीवन जीने की कला और मानवीय मूल्य
अतुल कृष्ण भारद्वाज महाराज ने बताया कि रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि जीवन जीने की कला का मार्गदर्शक है। उन्होंने जोर दिया कि यह महाकाव्य सम्मान, सेवा, त्याग और गरिमा बनाए रखने के मूल्यों को सिखाता है।
उन्होंने भक्तों को विशेष रूप से याद दिलाया कि किसी भी व्यक्ति की संपत्ति, चाहे उसकी कीमत कितनी भी हो, उस पर दूसरे का कोई अधिकार नहीं होता। 14 वर्ष के वनवास के बाद भगवान राम की अयोध्या वापसी पर उन्होंने कहा कि यह घटना धैर्य और सत्य के मार्ग पर चलने की सीख देती है।
सेवा और सामाजिक एकता का संदेश
कथावाचक ने कहा कि ईश्वर हर कण में वास करता है और गरीबों व जरूरतमंदों की सेवा करना ईश्वर की सेवा के समान है। उन्होंने बताया कि वनवास के दौरान भगवान राम ने प्रेम और करुणा के जरिए वनवासियों और आदिवासी समुदायों को एकजुट किया और इसी सामूहिक शक्ति से बुराई को हराया।
उन्होंने समाज से अपील की कि वर्तमान सामाजिक समस्याओं से लड़ने के लिए नेक दिल व्यक्तियों को एकजुट किया जाए। महाराज ने अंत में कहा कि झूठ और अनैतिकता चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न दिखे, सत्य और धर्म की हमेशा जीत होगी।
इस कार्यक्रम में पूर्व विधायक शरद कुमार अवस्थी, भाजपा नेता गौरीकांत दीक्षित, समाजसेवी रविकांत पांडेय, पवन ओझा, निखिल पांडेय और अखिल पांडेय समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।









