रिपोर्ट: राहुल त्रिपाठी
बाराबंकी के सुरसंदा में स्थित मजार हजरत मखदूम शाह की प्रबंधन समिति ने अपनी वक्फ संपत्ति से जुड़े एक पुराने विवाद में बड़ी कानूनी जीत हासिल की है। 31 अक्टूबर 2026 को सिविल जज (जूनियर डिवीजन), कोर्ट नंबर 13 ने अपना फैसला सुनाते हुए विपक्षी पार्टी द्वारा दायर दावों को खारिज कर दिया।
समिति के प्रतिनिधियों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस फैसले की जानकारी साझा की। समिति अधिकारियों के अनुसार, उन्होंने कोर्ट में ऐतिहासिक सरकारी दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण सबूत पेश कर अपनी स्थिति को सफलतापूर्वक साबित किया।
सच्चाई की जीत और कानूनी प्रभाव
समिति के अध्यक्ष अली वारिस, जिन्हें मुन्ना कुरैशी के नाम से भी जाना जाता है, ने इस फैसले को सच्चाई की जीत बताया और न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय मजार की ऐतिहासिक वक्फ संपदा के संरक्षण में एक मील का पत्थर है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में निम्नलिखित लोग मौजूद रहे:
- एडवोकेट मेराज अंसारी और एडवोकेट अभिषेक दास
- भारतीय किसान यूनियन (भानू) के राज्य महासचिव खालिद खान
- रवि वर्मा और सोनू शर्मा
उपस्थित लोगों ने इस परिणाम को समिति की एक बड़ी कानूनी जीत बताया और कहा कि इससे संपत्ति की सुरक्षा के संबंध में उनकी स्थिति मजबूत हुई है। समिति ने कहा कि हालांकि इस फैसले से उनकी स्थिति मजबूत हुई है, लेकिन विस्तृत कोर्ट ऑर्डर मिलने के बाद कानूनी प्रभावों और संपत्ति अधिकारों का अंतिम मूल्यांकन किया जाएगा।









