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भारत और मैक्सिको के बीच व्यापार समझौता शुरू, टैरिफ बाधाओं को कम करने के लिए हुई आधिकारिक बातचीत

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Naradsamvad - Narad news Agency
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भारत और मैक्सिको ने प्रिफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (PTA) के लिए औपचारिक बातचीत शुरू करने हेतु ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ पर आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मैक्सिकन राष्ट्रपति क्लाउडिया शाइनबॉम के बीच जून 2025 में कनाडा में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुई रणनीतिक समझ के बाद उठाया गया है।

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कॉमर्स Secretary राजेश अग्रवाल ने 28 अक्टूबर, 2026 को मैक्सिको सिटी में हस्ताक्षर समारोह का नेतृत्व किया। यह कदम हाल ही में मैक्सिको द्वारा उठाए गए टैरिफ उपायों की सीधी प्रतिक्रिया है, जिसके तहत भारत सहित विभिन्न गैर-वरीयता भागीदारों के उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाया गया था।

व्यापार ढांचे और नियमों का दायरा

Press Information Bureau, Business Standard, The Hindu, CNBC-TV18 और Financial Express की रिपोर्ट पुष्टि करती हैं कि नया हस्ताक्षर किया गया ढांचा व्यापार के जटिल क्षेत्रों को नियंत्रित करेगा। यह समझौता वस्तुओं के लिए बाजार पहुंच, मूल के नियम (rules of origin), सीमा शुल्क प्रक्रियाओं और व्यापार सुविधा पर केंद्रित होगा।

  • विवाद निपटान तंत्र और सैनिटरी एवं फाइटोसैनिटरी उपाय।
  • व्यापार में तकनीकी बाधाएं और व्यापार उपचार।
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विनिर्माण और तकनीक में विस्तार

दोनों देश इस समझौते के तहत संभावित विस्तार के लिए विशिष्ट औद्योगिक क्षेत्रों को लक्षित कर रहे हैं। ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े भारतीय निर्यातकों को कम टैरिफ बाधाओं से लाभ मिलने की उम्मीद है।

एनर्जी सेक्टर, क्रिटिकल मिनरल्स, मेडिकल डिवाइसेस और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग के निवेशकों को भी फायदा होगा क्योंकि सप्लाई चेन बदल रही है। व्यापार विश्लेषकों का कहना है कि इस समझौते से भारतीय व्यवसायों को मैक्सिको के जरिए उत्तरी अमेरिकी सप्लाई चेन में अधिक प्रभावी ढंग से जुड़ने में मदद मिल सकती है।

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बातचीत करने वालों की मुख्य प्राथमिकता असली वैल्यू एडिशन सुनिश्चित करने के लिए मार्केट एक्सेस और मूल के नियमों के बीच संतुलन बनाना होगा। अधिकारियों ने कहा है कि कम संवेदनशीलता वाले क्षेत्रों में त्वरित जीत के लिए ‘अर्ली हार्वेस्ट एग्रीमेंट’ पर चर्चा की जा सकती है।

वर्तमान ढांचे का उद्देश्य दोनों देशों के लिए सप्लाई चेन में विविधता लाना है। हालांकि, मैक्सिकन उपभोक्ताओं और निर्माताओं को अधिक प्रतिस्पर्धी इनपुट मिल सकते हैं, लेकिन समझौता पूरा होने के बाद दोनों देशों के स्थानीय उत्पादकों को अधिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।

व्यापार विशेषज्ञों ने इस हस्ताक्षर को गहरे आर्थिक एकीकरण की दिशा में एक व्यावहारिक कदम बताया है। पहली आधिकारिक बातचीत के दौर की समयसीमा और शुरुआती कार्रवाई के लिए निर्धारित विशिष्ट उत्पादों के संबंध में कई सवाल अभी भी बने हुए हैं।

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स्टेकहोल्डर्स इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि यह समझौता दोनों देशों के बीच वर्तमान व्यापार मात्रा को कैसे प्रभावित करेगा। जब तकनीकी समितियां अपना काम शुरू करेंगी, तब कॉमर्स मिनिस्ट्री अधिक स्पष्टता प्रदान करेगी।

आगे बढ़ते हुए, दोनों देशों की बातचीत करने वाली टीमें समझौते को तैयार करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करेंगी। आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए 2027 की पहली तिमाही में भारत के लिए एक मैक्सिकन बिजनेस मिशन के आने की उम्मीद है। अधिकारी बातचीत आगे बढ़ने के साथ द्विपक्षीय व्यापार डेटा की बारीकी से निगरानी करना जारी रखेंगे।

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