उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बहुत ही अजीब घटना सामने आई है। दातागंज के पूर्व विधायक विनोद शाक्य, जिन्हें सिनोड शाक्य भी कहा जाता है, एक ही दिन में दो अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ नजर आए। 26 अक्टूबर 2024 को उन्हें भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई राज्य कार्यकारिणी समिति के सदस्य के रूप में नामित किया गया, जबकि उसी दिन उन्होंने औपचारिक रूप से समाजवादी पार्टी (SP) की सदस्यता ले ली थी।
यह मामला तब सामने आया जब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कार्यकारिणी की एक विस्तृत सूची जारी की। इस सूची में कुल 548 समिति सदस्य, 30 स्थायी आमंत्रित सदस्य और 134 विशेष आमंत्रित सदस्य शामिल किए गए हैं। विनोद शाक्य का नाम भी इसी सूची में शामिल था, जबकि वे उसी दोपहर लखनऊ में समाजवादी पार्टी में शामिल हो चुके थे।
विनोद शाक्य ने लखनऊ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। यह बदलाव इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि इससे पहले 10 अक्टूबर 2024 को शाक्य ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उनका भाजपा छोड़ने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने उस समय यह भी दावा किया था कि वे भविष्य के चुनाव भाजपा के टिकट पर ही लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
भाजपा की सूची और संगठनात्मक तैयारी
विनोद शाक्य के भाजपा छोड़ने की चर्चाएं तब शुरू हुई थीं जब एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे समाजवादी पार्टी के एक सांसद के साथ नजर आए थे। इसके बावजूद, भाजपा की नई राज्य कार्यकारिणी की सूची में उनका नाम शामिल कर लिया गया। यह पूरी कार्यकारिणी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले एक रणनीतिक कदम है।
इस नई कार्यकारिणी समिति में कई बड़े राष्ट्रीय दिग्गजों को भी जगह दी गई है। स्थायी आमंत्रित सदस्यों की सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नाम शामिल हैं। एक ही दिन भाजपा की सूची में नाम आने और सपा में शामिल होने की इस घटना ने भाजपा के आंतरिक तालमेल और सूची तैयार करने के समय को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अखिलेश यादव का बयान और भाजपा पर हमला
समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद अखिलेश यादव ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि विनोद शाक्य जैसे नेताओं के आने से समाजवादी पार्टी राज्य के पूर्व से पश्चिम तक और अधिक मजबूत होगी। इस मौके का इस्तेमाल करते हुए यादव ने भाजपा और चुनाव आयोग पर भी निशाना साधा।
अखिलेश यादव ने वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों का आरोप लगाया और इस मुद्दे पर भाजपा की आलोचना की। साथ ही उन्होंने एक बड़ा वादा भी किया कि यदि अगली बार समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है, तो महर्षि वाल्मीकि जयंती पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाएगा।
2027 चुनावों के लिए भाजपा की रणनीति
दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी 2027 के चुनावों की तैयारियों में जुटी हुई है। पार्टी के संगठन को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर योजनाएं बनाई जा रही हैं। इसी सिलसिले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का लखनऊ दौरा तय हुआ है।
अमित शाह 30 और 31 अक्टूबर को लखनऊ पहुंचेंगे। वहां वे पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ बैठक करेंगे और आगामी चुनावों के लिए चुनावी रणनीति पर विस्तार से चर्चा करेंगे।









