आगरा डिवीजन टीचर्स कॉन्स्टिट्यूएंसी MLC चुनाव के लिए 26 अक्टूबर 2026 को रीपोलिंग के दौरान भारी तनाव फैल गया। इस दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (SP) के समर्थकों के बीच सइयां पोलिंग बूथ पर आपस में टकराव हो गया।
यह रीपोलिंग 23 अक्टूबर 2026 को हुए मूल मतदान के बाद कराई गई थी। उस समय बूथ कैप्चरिंग और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद चुनाव आयोग ने तीन जगहों पर दोबारा मतदान कराने का आदेश दिया था।
दोबारा मतदान की प्रक्रिया सइयां, खेरनगर और फतेहाबाद के केंद्रों पर आयोजित की गई। वोटिंग की यह प्रक्रिया सुबह 8:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक चली, जबकि वोटों की गिनती 27 अक्टूबर को फिरोजाबाद रोड स्थित गल्ला मंडी में होनी तय हुई है।
सइयां बूथ पर हंगामा और पुलिस की कार्रवाई
सइयां बूथ पर हुई घटना के दौरान समाजवादी पार्टी के समर्थक पुलिसकर्मियों से भिड़ गए। स्थिति बिगड़ते देख पुलिस अधिकारियों को इलाके को खाली कराना पड़ा ताकि व्यवस्था बहाल की जा सके।
तनाव को नियंत्रित करने के लिए डीसीपी वेस्टर्न जोन आदित्य कुमार, एसीपी श्वेता वर्मा और एसएचओ प्रदीप कुमार त्रिपाठी तुरंत मौके पर पहुंचे। उत्तर प्रदेश पुलिस ने चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी थी।
सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए पुलिस बलों के साथ-साथ क्विक रिस्पांस टीम (QRT) और प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबल (PAC) की तैनाती की गई थी। केंद्रों के चारों ओर अतिरिक्त बैरिकेड लगाए गए और अंदर जाने से पहले मतदाताओं के सत्यापन की प्रक्रिया अपनाई गई।
उम्मीदवारों के आरोप और प्रशासनिक निगरानी
समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार डॉ. आकाश अग्रवाल ने पहले ही डिविजनल कमिश्नर नगेंद्र प्रताप के पास शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने मतदाताओं को डराने-धमकाने और बूथ कैप्चरिंग के आरोप लगाए थे।
एसपी सांसद रामजीलाल सुमन ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने इस दौरान दबंगई की है। दूसरी ओर, राज्य मंत्री धर्मवीर प्रजापति ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। निगरानी प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट मनीष बंसल ने स्वयं पोलिंग सेंटरों का निरीक्षण किया।
पिछली गड़बड़ियों पर कानूनी कार्रवाई
प्रशासन ने बताया कि पहले चुनाव में हुई गड़बड़ियों के संबंध में सइयां और फतेहाबाद पुलिस स्टेशनों में मामले दर्ज किए गए हैं।
- सइयां थाने में चुनावी अनियमितताओं की रिपोर्ट दर्ज हुई।
- फतेहाबाद थाने में भी गड़बड़ियों को लेकर केस दर्ज किया गया।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले मतदान के दौरान जिन अधिकारियों से लापरवाही हुई थी, उन्हें इस रीपोलिंग ड्यूटी से बाहर रखा गया था।









