भारत निर्वाचन आयोग ने आगरा मंडल शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के MLC चुनाव के दौरान हुई गड़बड़ियों और पर्यवेक्षण में लापरवाही के बाद बड़ी कार्रवाई की है। आयोग ने इस मामले में 6 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही 21 अन्य कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की गई है।
यह पूरी कार्रवाई 26 अक्टूबर 2026 को आदेशित की गई। यह फैसला आगरा मंडल के कमिश्नर नागेंद्र प्रताप द्वारा 25 अक्टूबर को सौंपी गई एक औपचारिक जांच रिपोर्ट के बाद लिया गया है।
तीन पोलिंग स्टेशनों पर मतदान रद्द और दोबारा वोटिंग
जांच में मिली खामियों के कारण आयोग ने तीन मतदान केंद्रों पर हुई शुरुआती वोटिंग को रद्द कर दिया। इनमें पोलिंग स्टेशन 20 (खेरागढ़), 21 (सैयान) और 26 (फतेहाबाद) शामिल हैं। इन केंद्रों पर गड़बड़ी मिलने के बाद 26 अक्टूबर 2026 को दोबारा मतदान कराना जरूरी हो गया था।
आयोग ने सस्पेंड किए गए अधिकारियों की सूची जारी की है। पोलिंग स्टेशन 21 (सैयान) से सेक्टर मजिस्ट्रेट ओ.पी. चक, क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर हरीशरण सिंह और सब-इंस्पेक्टर संदीप कुमार को निलंबित किया गया है।
वहीं पोलिंग स्टेशन 26 (फतेहाबाद) से सेक्टर मजिस्ट्रेट विशाल राठौर, इंस्पेक्टर पुरुषोत्तम पाल और सब-इंस्पेक्टर सुमित त्यागी को निलंबित किया गया है। इन सभी अधिकारियों को विभागीय कार्रवाई का सामना करना होगा और उनके खिलाफ औपचारिक चार्जशीट तैयार की जाएगी। आयोग ने निर्देश दिया है कि चार्जशीट के ड्राफ्ट 10 दिनों के भीतर मंजूरी के लिए जमा किए जाएं।
21 अन्य कर्मचारियों पर गिरी गाज
सस्पेंशन के अलावा, बूथ संख्या 21 और 26 पर तैनात 21 अन्य कर्मचारियों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की गई है। इस समूह में कुल 5 पोलिंग अधिकारी शामिल हैं, जिनमें दो पीठासीन अधिकारी (Presiding Officers) भी हैं।
पुलिस विभाग के भी कई लोग इस कार्रवाई की जद में आए हैं। इसमें कुल 16 पुलिस कर्मी शामिल हैं, जिनमें 5 हेड कांस्टेबल और 11 कांस्टेबल हैं।
बूथ कैप्चरिंग की शिकायत और अधिकारियों की भूमिका
यह पूरी जांच समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आकाश अग्रवाल द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों के बाद शुरू हुई। उन्होंने बूथ कैप्चरिंग और दुर्व्यवहार की गंभीर शिकायतें दर्ज कराई थीं।
इन शिकायतों ने जिला मजिस्ट्रेट मनीष बंसल और पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार सहित स्थानीय अधिकारियों द्वारा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इसी आधार पर चुनाव आयोग ने यह सख्त कदम उठाया है।









