व्यवसायी शिवा शर्मा की मौत की जांच में लखनऊ पुलिस ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। 9 अक्टूबर को एक अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरने के बाद शिवा शर्मा की मृत्यु हो गई थी। इस मामले की जांच के दौरान लापरवाही के आरोप लगे हैं।
पुलिस कमिश्नर तरुण गाबा ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए हजरतगंज कोतवाली के SHO विक्रम सिंह को हटा दिया है। उन्हें अब पुलिस लाइन भेज दिया गया है। इस बीच DCP सेंट्रल विक्रांत वीर की स्थिति को लेकर कई रिपोर्टें सामने आई हैं।
पुलिस प्रशासन अब इस मामले के तीन मुख्य आरोपियों की तलाश में जुटा हुआ है। फरार आरोपियों में श्रद्धा दुबे, उनकी बहन रश्मि दुबे और उनका ड्राइवर दानिश शामिल हैं। पुलिस इन तीनों को पकड़ने के लिए लगातार छापेमारी कर रही है।
फरार आरोपियों पर इनाम और पुलिस की छापेमारी
पुलिस ने फरार चल रहे इन तीनों संदिग्धों को पकड़ने के लिए इनाम की राशि बढ़ा दी है। पहले इन आरोपियों पर 25,000 रुपये का इनाम था, जिसे अब बढ़ाकर 50,000 रुपये प्रति व्यक्ति कर दिया गया है।
पुलिस की टीमें संदिग्धों की तलाश में नेपाल तक छापेमारी कर चुकी हैं और कड़ी निगरानी रखी जा रही है। हालांकि, आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। इसी बीच श्रद्धा दुबे और दानिश ने स्थानीय अदालत में सरेंडर करने के लिए आवेदन दाखिल किया है।
मृत्यु के कारणों पर अलग-अलग दावे
18 अक्टूबर 2026 को श्रद्धा दुबे मीडिया के सामने आईं और अपना पक्ष रखा। उन्होंने दावा किया कि शिवा शर्मा की मौत आत्महत्या थी। श्रद्धा के अनुसार, शर्मा पर 16-17 लाख रुपये का कर्ज था, जिसकी वजह से उन्होंने यह कदम उठाया।
श्रद्धा का यह बयान शिवा शर्मा की मां द्वारा लगाए गए आरोपों से बिल्कुल अलग है। शिवा शर्मा की मां ने इस मामले में हत्या का आरोप लगाया है। पुलिस अब इन दोनों विरोधाभासी बयानों की गहराई से जांच कर रही है।
श्रद्धा दुबे पर अन्य कानूनी कार्रवाई और जांच
श्रद्धा दुबे कानूनी मुश्किलों में घिरी हुई हैं और पुलिस ने उनके खिलाफ कई कदम उठाए हैं। हजरतगंज के बालू अड्डा इलाके में स्थित उनका फ्लैट पुलिस ने सील कर दिया है। इसके अलावा उन्हें एक अन्य मामले में भी पेश होना है।
- श्रद्धा दुबे को 30 अक्टूबर 2026 को सहारनपुर कोर्ट में पेश होना है।
- यह मामला साल 2024 के एक साइबर फ्रॉड केस से जुड़ा हुआ है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस की कार्रवाई से ठीक पहले श्रद्धा दुबे आगरा में एक सीनियर एडवोकेट से मिलती हुई देखी गई थीं। DCP सेंट्रल विक्रांत वीर ने स्पष्ट किया है कि पुलिस इलेक्ट्रॉनिक सबूतों और रणनीतिक ऑपरेशन्स का इस्तेमाल कर रही है ताकि जल्द से जल्द आरोपियों को पकड़ा जा सके।

























