भारत के सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है जिसमें Yes Bank द्वारा 8415 करोड़ रुपये के Additional Tier 1 (AT 1) बॉन्ड्स को राइट ऑफ (खाते से हटाना) करने के निर्णय को रद्द कर दिया गया था। इस न्यायिक फैसले के बाद ये बॉन्ड्स अब बॉन्डधारकों को वापस मिल जाएंगे।
अदालत ने आदेश दिया है कि Yes Bank को अब मूल सूचना मेमोरेंडम के अनुसार इन बॉन्ड्स पर कूपन भुगतान फिर से शुरू करना होगा। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने 15 अक्टूबर 2026 को यह फैसला सुनाया।
बेंच ने Yes Bank, Reserve Bank of India (RBI) और भारत सरकार द्वारा दायर सामूहिक अपीलों को खारिज कर दिया। यह फैसला उस कानूनी लड़ाई का अंत है जो मार्च 2020 में बैंक के पुनर्निर्माण के बाद पिछले छह वर्षों से चल रही थी।
बॉन्ड्स को जीरो करने का विवाद और कानूनी चुनौती
Yes Bank ने 14 मार्च 2020 को स्टॉक एक्सचेंजों को सूचित किया था कि उसके प्रशासक ने इन बॉन्ड्स की वैल्यू घटाकर शून्य कर दी है। भारत में इस तरह के वित्तीय साधनों को पूरी तरह से राइट ऑफ करने का यह पहला मामला था।
बैंक ने इस कदम के पीछे मुख्य कारण गंभीर वित्तीय तनाव के समय नुकसान की भरपाई करना बताया था। Axis Trustee Services द्वारा प्रतिनिधित्व करने वाले निवेशकों, विभिन्न म्यूचुअल फंड्स और रिटेल धारकों ने इस फैसले को बॉम्बे हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
इन निवेशकों का तर्क था कि पुनर्निर्माण योजना के तहत प्रशासक के पास इन बॉन्ड्स को खत्म करने का कोई स्पष्ट अधिकार नहीं था। जनवरी 2023 में हाई कोर्ट ने बॉन्डधारकों के पक्ष में फैसला सुनाया, हालांकि बाद में बैंक ने उस आदेश पर रोक लगवा ली थी।
बैंक की पूंजी और कमाई पर पड़ने वाला असर
स्वतंत्र वित्तीय स्रोतों ने पुष्टि की है कि इस देनदारी के वापस आने से बैंक के Common Equity Tier 1 कैपिटल बफर पर तत्काल दबाव पड़ेगा। 30 जून 2026 तक के अनुमानों के अनुसार, इससे कैपिटल रेशियो में लगभग 250 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आ सकती है।
CNBC TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक, इससे बैंक की कमाई पर 5300 से 5400 करोड़ रुपये का एकमुश्त असर पड़ सकता है। यह राशि जून तिमाही के दौरान बैंक द्वारा दर्ज किए गए 1071 करोड़ रुपये के शुद्ध लाभ से लगभग पांच गुना अधिक है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पैराग्राफ 81 में स्पष्ट किया गया है कि कानूनी लड़ाई के बावजूद वार्षिक कूपन भुगतान अप्रभावित रहेंगे। अदालत ने यह भी गौर किया कि Yes Bank ने इन उच्च जोखिम वाले साधनों को रिटेल निवेशकों को सक्रिय रूप से बेचा था, जबकि आमतौर पर ऐसे उत्पाद केवल संस्थागत निवेशकों के लिए होते हैं।
बाजार की प्रतिक्रिया और भविष्य की जिम्मेदारियां
Business Standard और LiveLaw जैसी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बैंक वर्तमान में इस आदेश के प्रभावों की समीक्षा कर रहा है। इस फैसले के बाद 15 और 16 अक्टूबर 2026 को Yes Bank के शेयरों में लगभग 14.4 से 14.5 प्रतिशत की गिरावट आई और शेयर 18.12 से 18.15 रुपये के करीब बंद हुए।
संस्थागत हितधारकों में Sumitomo Mitsui Banking Corporation की 24 प्रतिशत हिस्सेदारी है, हालांकि निवेश से पहले की देनदारियों का मामला उनके विशिष्ट अनुबंध समझौतों के अधीन है। अब शेयरधारकों को पूंजी कम होने (कैपिटल डाइल्यूशन) की संभावना का सामना करना पड़ सकता है यदि बैंक अपने रेगुलेटरी बफर्स को बहाल करने के लिए नया इक्विटी फंड जुटाता है।
इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि जब तक किसी विशिष्ट योजना में स्पष्ट अधिकार न हो, AT 1 इंस्ट्रूमेंट्स को खत्म नहीं किया जा सकता। Financial Express की रिपोर्ट्स में कानूनी विशेषज्ञों ने कहा है कि यह फैसला भविष्य में Reserve Bank of India द्वारा बनाए जाने वाले रेजोल्यूशन प्लान्स को प्रभावित करेगा।
- बैंक को अब इस देनदारी को अपने बैलेंस शीट में दर्ज करने का प्रशासनिक काम करना होगा।
- निवेशक अब कूपन भुगतान की सटीक समयसीमा के लिए एक्सचेंज खुलासे का इंतजार कर रहे हैं।
इस विशिष्ट मामले पर सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही अब पूरी तरह समाप्त हो गई है। अब बैंक को आने वाली तिमाहियों में अनुपालन और पूंजी की जरूरतों को पूरा करना होगा।

























