Skip to main content

Naradsamvad

ब्रेकिंग न्यूज़
[post-views]

जंतर मंतर प्रदर्शन के बाद CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रंका तिहाड़ जेल भेजे गए

Cockroach Janta Party (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रंका को 14 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद अदालत ने उन्हें पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जिसके बाद उन्हें तिहाड़ जेल में रखा गया है।

Ad image

दिल्ली पुलिस ने इन दोनों नेताओं को जंतर मंतर प्रदर्शन स्थल पर बिना अनुमति प्रवेश करने और जमानत की पिछली शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप में पकड़ा था।

इन नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। साथ ही उन्होंने मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन किया था।

शांति समझौते का उल्लंघन और जेल रिकॉर्ड

इन नेताओं ने 11 अक्टूबर 2026 को एक शांति बॉन्ड पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते में उन्होंने वादा किया था कि वे एक साल तक किसी भी तरह की विघटनकारी गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने प्रदर्शन किया।

ALSO READ  Yes Bank AT1 बॉन्ड मामला: सुप्रीम कोर्ट ने निवेशकों के हक में सुनाया फैसला, 8,415 करोड़ रुपये के बॉन्ड बहाल

जेल के रिकॉर्ड के अनुसार, सौरव दास को कैदी नंबर 3752 के रूप में जेल नंबर 2 के वार्ड नंबर 3 में रखा गया है। वहीं आशुतोष रंका, जिनका कैदी नंबर 1784 है, जेल नंबर 4 के वार्ड नंबर 15 में बंद हैं।

प्रशासन ने दोनों व्यक्तियों को अलग-अलग हाई-सिक्योरिटी वार्डों में रखा है। जेल प्रशासन ने उनकी बैरकों के बाहर अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती भी की है।

अन्य गिरफ्तारियां और कानूनी धाराएं

CJP के एक तीसरे सदस्य अजिंक्य शिंदे को भी पकड़ा गया था, लेकिन उन्हें 5,000 रुपये के व्यक्तिगत बॉन्ड और एक जमानतदार पर रिहा कर दिया गया। उन्हें छह महीने तक अच्छे व्यवहार बनाए रखने की शर्त पर छोड़ा गया क्योंकि यह उनका पहला अपराध था।

ALSO READ  कानपुर में नकली सीमेंट का बड़ा खेल उजागर, लखनऊ एयरपोर्ट और सीएम ग्रिड रोड में लगाया गया घटिया माल

पुलिस ने इन गिरफ्तारियों के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत कानूनी कार्रवाई की है। उन पर सरकारी अधिकारियों के काम में बाधा डालने और विरोध प्रदर्शन के अनिवार्य नियमों को तोड़ने के आरोप हैं।

  • सुप्रीम कोर्ट की 2018 की गाइडलाइन्स के अनुसार, जंतर मंतर पर प्रदर्शन के लिए कम से कम 10 दिन पहले न्यू दिल्ली जिले के डीसीपी से अनुमति लेना जरूरी है।
  • इन नियमों का उल्लंघन करने पर BNSS की धारा 223 के तहत एक से छह महीने की जेल हो सकती है।
  • बिना अनुमति प्रवेश और सरकारी काम में बाधा डालने के मामलों में तीन से पांच साल की सजा का प्रावधान है।
ALSO READ  Toyota ने लॉन्च की नई Glanza, ADAS फीचर्स के साथ कीमत 6.99 लाख रुपये से शुरू

नेताओं की प्रतिक्रिया और राजनीतिक समर्थन

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पुलिस की इस कार्रवाई की सार्वजनिक रूप से आलोचना की है। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या अब राष्ट्रीय ध्वज दिखाना भी एक आपराधिक कृत्य मान लिया गया है।

इस घटना के बाद कई बड़े विपक्षी नेताओं ने हिरासत में लिए गए नेताओं के प्रति अपना समर्थन जताया है। इनमें राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।

अन्य खबरे

गोल्ड एंड सिल्वर

Our Visitors

1614697
Total Visitors
error: Content is protected !!