मेरठ की जिला अदालत ने एक सनसनीखेज मामले में शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को बड़ा फैसला सुनाया है। अपर जिला न्यायाधीश (ADJ-12) जयवीर सिंह नगर ने अमित कश्यप की हत्या के मामले में उसकी पत्नी रविता और प्रेमी अमरदीप को मौत की सजा सुनाई है।
अदालत ने इस पूरे मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ यानी अत्यंत दुर्लभ श्रेणी का माना है। इसी आधार पर न्यायाधीश ने दोनों दोषियों को मृत्युदंड देने का निर्णय लिया।
मृतक अमित कश्यप बहमसुमा के अकबरपुर सदात का रहने वाला था। उसकी हत्या 17 अप्रैल 2025 की रात को गला घोंटकर की गई थी।
सांप के जरिए मौत का रचा गया था जाल
अमित की हत्या के बाद आरोपियों ने इस वारदात को एक हादसे का रूप देने की कोशिश की। दोषियों ने शरीर पर एक ‘घोड़ापछाड़’ सांप रख दिया था ताकि सबको लगे कि अमित की मौत सांप के काटने से हुई है।
जांच में यह बात सामने आई कि इस हत्या की साजिश काफी पहले ही रच ली गई थी। सांप के जरिए अमित को मारने की योजना 12 अप्रैल 2025 को ही बना ली गई थी।
पोस्टमार्टम और कॉल रिकॉर्ड से खुला राज
इस केस की जांच सब-इंस्पेक्टर इंदु वर्मा ने की थी। शुरुआत में मृतक के परिवार और रविता ने पोस्टमार्टम कराने का विरोध किया था, लेकिन सब-इंस्पेक्टर इंदु वर्मा ने पोस्टमार्टम कराने की जिद की।
मेडिकल रिपोर्ट में यह साफ हो गया कि अमित की मौत सांप के काटने से नहीं बल्कि गला घोंटने से हुई थी। इसके बाद जब कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच हुई, तो रविता और अमरदीप के बीच अवैध संबंधों का खुलासा हुआ।
अदालत की कार्यवाही और फैसला
इस मामले की सुनवाई करीब 13 से 17 महीनों तक चली। इस दौरान अदालत ने कुल 12 गवाहों के बयान दर्ज किए और 86 से 87 दलीलों को सुना। इसके बाद 7 अक्टूबर 2026 को दोनों को दोषी पाया गया।
16 अक्टूबर 2026 को सजा सुनाते समय न्यायाधीश नगर ने मनुस्मृति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अधर्म कभी भी धर्म पर जीत हासिल नहीं कर सकता। उन्होंने विश्वासघात की गंभीरता को बताने के लिए पौराणिक पात्र सावित्री का उदाहरण भी दिया।
सजा के समय दोनों दोषियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया। बताया गया कि इलाके में एक अन्य मौत की सजा के फैसले के बाद वे पिछले एक दिन से काफी तनाव में थे।
परिजनों की प्रतिक्रिया और कानूनी स्थिति
मृतक अमित की मां मुनेश देवी ने इस फैसले पर संतोष जताया है। उन्होंने कहा कि अब जाकर उन्हें न्याय मिला है।
रविता और अमरदीप फिलहाल हिरासत में हैं और उन्हें सेंट्रल जेल भेजा जाना है। हालांकि, उनके पास इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करने का कानूनी अधिकार है।
रविता के परिवार ने जेल में उससे मुलाकात नहीं की है। इस वजह से रविता की पैरवी सरकारी वकील द्वारा की जा रही है।

























