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बाराबंकी में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर सेमिनार आयोजित, शिक्षा और एकता पर दिया जोर

बाराबंकी जिले की रामनगर विधानसभा क्षेत्र के सिरौली गौसपुर तहसील में स्थित सैदनपुर के मदरसा अल-जामियातुल अशरफिया रज्जाकिया फख्रुल उलूम में एक सेमिनार का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती के अवसर पर उनके सम्मान में आयोजित किया गया था।

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इस कार्यक्रम के दौरान भारत रत्न से सम्मानित डॉ कलाम द्वारा विज्ञान के क्षेत्र में दिए गए योगदान को याद किया गया। साथ ही शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और राष्ट्रीय विकास के लिए उनके समर्पण का सम्मान किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सदर इकबाल अंसारी ने की। मदरसा मैनेजर असरार अंसारी ने पूरे आयोजन की व्यवस्थाओं और संगठनात्मक कार्यों की देखरेख की। इस अवसर पर ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसीम रेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

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मुख्य अतिथि के साथ अजय गुरु और एडवोकेट राघवधीर सिंह सुमन भी मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम का संचालन मदरसा के प्रिंसिपल द्वारा किया गया।

विविधता और प्रेरणा पर विचार

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अजय गुरु ने एक बगीचे का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह अलग-अलग तरह के फूल एक बगीचे की खूबसूरती को बढ़ाते हैं, ठीक उसी तरह अलग-अलग धर्मों, जातियों और विचारधाराओं का एक साथ रहना देश को मजबूत बनाता है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि डॉ कलाम का जीवन सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि डॉ कलाम ने यह साबित किया कि मेहनत और प्रतिभा के दम पर दुनिया भर में पहचान बनाई जा सकती है।

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सादगी और राष्ट्रीय सेवा का संदेश

एडवोकेट राघवधीर सिंह सुमन ने डॉ कलाम की विरासत पर चर्चा की और उन्हें देश का गौरव बताया। उन्होंने कहा कि डॉ कलाम का जीवन सादगी, अनुशासन, कड़ी मेहनत और राष्ट्रीय सेवा का एक अनूठा उदाहरण है।

उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे डॉ कलाम के जीवन से सीख लें और अपने जीवन में बड़े और महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करें।

शिक्षा और वैज्ञानिक सोच की आवश्यकता

मुख्य अतिथि वसीम रेन ने डॉ कलाम को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने बहुत सीमित संसाधनों के बावजूद देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद को हासिल किया। उन्होंने कहा कि भारत को एक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लिए शिक्षा, वैज्ञानिक सोच और इनोवेशन बहुत जरूरी हैं।

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वसीम रेन ने यह भी कहा कि शिक्षा, भाईचारे और सकारात्मक सोच का डॉ कलाम का संदेश समाज के सभी वर्गों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है।

नई पीढ़ी को मार्गदर्शन और आभार

सदर इकबाल अंसारी ने नई पीढ़ी से अपील की कि वे पूर्व राष्ट्रपति के जीवन से प्रेरणा लें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महान नेताओं के मूल्यों और आदर्शों को आगे बढ़ाना समय की जरूरत है।

कार्यक्रम के अंत में मैनेजर असरार अंसारी ने सभी का धन्यवाद किया। इस आयोजन के माध्यम से डॉ कलाम के आदर्शों के अनुरूप शिक्षा, एकता और भाईचारे का संदेश सफलतापूर्वक दिया गया।

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