मुंबई पुलिस ने गोवा के लग्जरी विला से संचालित हो रहे एक बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस गिरोह ने हजारों फर्जी बैंक खातों के जरिए लगभग 900 करोड़ रुपये की हेराफेरी की। 14 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह जांच बताती है कि कैसे अपराधी वित्तीय अपराधों को छिपाने के लिए पर्यटन स्थलों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
पुलिस को इस पूरे खेल का पता जुलाई 2026 में एक गुप्त सूचना मिलने के बाद चला। यह सूचना दक्षिण मुंबई में स्थित G.D. Overseas नाम की एक फर्जी कंपनी के बारे में थी। इस कंपनी के मस्जिद बंडर स्थित ऑफिस के कर्मचारियों का काम करंट बैंक खाते खोलना और जरूरी कागजात गोवा में बैठे ऑपरेटरों तक पहुंचाना था।
इस मामले की जांच कर रही मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच ने 4 अगस्त 2026 को कैंडोलिम और कलंगुट इलाके के Casa De Nicole विला पर छापा मारा। इस शुरुआती छापेमारी के दौरान पुलिस ने 12 युवकों को गिरफ्तार किया। इनमें से 11 लोग गुजरात के रहने वाले थे और एक व्यक्ति मुंबई का था।
छापेमारी में बरामद सामान और काम करने का तरीका
पुलिस ने छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज जब्त किए। जब्त सामान में 15 लैपटॉप, 128 एटीएम कार्ड, 85 मोबाइल फोन, 76 सिम कार्ड, 22 चेक बुक और 77 पासबुक शामिल हैं। ये सभी चीजें दुबई में बैठे हैंडलर्स के लिए भारी मात्रा में पैसों के लेन-देन को मैनेज करने के लिए इस्तेमाल की जा रही थीं।
यह सिंडिकेट पैसों के तुरंत ट्रांसफर के लिए ‘Banker Panel’ नाम के एक खास एप्लिकेशन का उपयोग करता था। ऑपरेटर सॉफ्टवेयर में पीड़ित के खाते का विवरण डालते थे, जिससे चंद सेकंड में पैसा हजारों मयूल (mule) खातों में बंट जाता था। इस तेज रफ्तार वितरण की वजह से बैंक उस ‘गोल्डन ऑवर’ का फायदा नहीं उठा पाते थे, जिसमें संदिग्ध लेनदेन को फ्रीज किया जा सकता है।
पुलिस ने पाया कि इस नेटवर्क से जुड़े खातों का संबंध 186 अलग-अलग साइबर अपराध मामलों से है। सितंबर 2026 में Sea Coast विला नामक एक अन्य प्रॉपर्टी पर दूसरी छापेमारी की गई। इसके बाद कुछ और गिरफ्तारियां हुईं, जिससे दोनों स्थानों से पकड़े गए संदिग्धों की कुल संख्या लगभग 22 हो गई है।
पैसे की हेराफेरी और गिरोह का ढांचा
पहली छापेमारी के बाद लगभग 7,500 खातों में फैले 120 करोड़ रुपये फ्रीज किए गए। वहीं दूसरी छापेमारी से 400 करोड़ रुपये के अवैध लेनदेन का खुलासा हुआ। अधिकारियों का अनुमान है कि इस गिरोह द्वारा संभाली गई कुल राशि 900 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
इस गिरोह का संचालन एक सख्त ढांचे के तहत किया जाता था। सबसे नीचे स्तर पर ग्राहक मयूल खाते उपलब्ध कराते थे, जबकि ‘मास्टर्स’ और ‘सुपरमास्टर्स’ मुंबई में इन खातों को हासिल कर उन्हें एक्टिवेट करते थे। गोवा में तैनात युवक एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में काम करते थे और पैसों के ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी करते थे।
पूरी कंपनी की निगरानी दुबई में बैठे लोगों द्वारा की जा रही थी, जिनमें रणवीर कपूर नाम का एक व्यक्ति शामिल है। जांच के दौरान पुलिस ने अहमदाबाद के रहने वाले अश्वत्थामा, जिसे बुआ स्मिथ के नाम से भी जाना जाता है, का पीछा किया और सितंबर की शुरुआत में उसे जयपुर में ट्रैक किया।
भर्ती का तरीका और पैसों का लेन-देन
इस गिरोह में भर्ती होने वाले लोग आमतौर पर गुजरात के 20 से 30 साल के युवक थे। उन्हें लगभग 35,000 रुपये का मासिक वेतन दिया जाता था। कुछ ऑपरेटरों को ट्रांसफर किए गए फंड पर 3% कमीशन सहित हर महीने 1 लाख से 1.5 लाख रुपये तक की कमाई होती थी।
विला के मालिकों को इस आपराधिक गतिविधि की जानकारी नहीं थी। उन्होंने अपनी प्रॉपर्टी दो महीने की अवधि के लिए लगभग 1 लाख रुपये में किराए पर दी थी। गोवा के पड़ोसियों ने अक्सर किरायेदारों के आने-जाने के अजीब समय पर ध्यान दिया था, लेकिन उन्होंने मान लिया कि वे केवल ऑफ-सीजन छुट्टी मनाने आए पर्यटक हैं।
लेनदेन को वैध दिखाने के लिए यह सिंडिकेट XXX247 और 900 Panel या Rudra जैसे प्रतिबंधित गेमिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग करता था। यह पैसा अंततः क्रिप्टो ट्रांजेक्शन या अंगड़िया नेटवर्क के जरिए दुबई पहुंचाया जाता था।
- इंडियन एक्सप्रेस, द हिंदू, टाइम्स ऑफ इंडिया और फ्री प्रेस जर्नल ने पुलिस ब्रीफिंग के जरिए इन विवरणों की पुष्टि की है।
- पुलिस अभी भी अधिक मयूल खातों की पहचान करने और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का पता लगाने के लिए जांच कर रही है।
- दुबई स्थित मुख्य हैंडलर्स को भारत लाने के प्रयास जारी हैं।
- बैंक और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया अब मल्टी-अकाउंट ट्रांसफर की निगरानी प्रणाली को सख्त कर सकते हैं।
- डिजिटल अरेस्ट स्कैम के खिलाफ जन जागरूकता अभियानों का विस्तार होने की संभावना है।









