उत्तर प्रदेश स्टेट कंस्ट्रक्शन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (UPSIDCO) ने प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू मेडिकल कॉलेज कैंपस में पीडियाट्रिक अस्पताल के निर्माण कार्य में बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने इस प्रोजेक्ट के लिए जिम्मेदार कंपनी RCB Infracons Private Limited का कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया है।
UPSIDCO के मैनेजिंग डायरेक्टर संजीव सिंह ने पुष्टि की है कि निर्माण एजेंसी को पांच साल की अवधि के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। यह फैसला प्रोजेक्ट में हुई भारी देरी और काम में पाई गई गंभीर अनियमितताओं के बाद लिया गया है।
कंपनी के फर्जी दस्तावेजों और कानूनी मामलों का खुलासा
जांच के दौरान यह पाया गया कि RCB Infracons ने रजिस्ट्रेशन के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था। इसके साथ ही कंपनी ने अपने डायरेक्टर के खिलाफ लंबित कानूनी मामलों की जानकारी भी छिपाई थी।
अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत UPSIDCO ने कंपनी की सिक्योरिटी और परफॉरमेंस गारंटी के कुल 55 लाख रुपये जब्त कर लिए हैं। विभाग अब ठेकेदार को दिए गए सभी एडवांस पेमेंट की वसूली के लिए जरूरी प्रक्रिया शुरू कर रहा है। इस प्रोजेक्ट के कॉन्ट्रैक्ट के दूसरे फेज को भी आधिकारिक तौर पर रद्द कर दिया गया है।
लापरवाह इंजीनियरों और अधिकारियों पर गिरी गाज
इस मामले में लापरवाही बरतने और बिना अनुमति के फंड जारी करने के आरोप में तीन इंजीनियरों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू की गई है। इनमें पूर्व सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर राजेश चौधरी, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर मनीष कुमार श्रीवास्तव और असिस्टेंट इंजीनियर धर्म शंकर त्रिपाठी शामिल हैं।
इसके अलावा, टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी, कंपनी रजिस्ट्रेशन और कॉन्ट्रैक्ट रिन्यूअल में भूमिका के लिए अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जा रही है। पूर्व सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर के.जी. दुबे और रिटायर्ड चीफ इंजीनियर पंकज चोपड़ा के खिलाफ प्रशासनिक और कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं।
अस्पताल के काम को पूरा करने की नई योजना
अस्पताल के निर्माण कार्य को समय पर पूरा करने के लिए अब इसे डिपार्टमेंटल कंस्ट्रक्शन यूनिट (DCU) मॉडल के तहत पूरा किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया और साइट की सीधी निगरानी के लिए पूर्व चीफ इंजीनियर अरविंद कुमार निर्मल को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
UPSIDCO ने इस मामले में एक विस्तृत जांच की घोषणा की है। इस जांच का मकसद उन अन्य ठेकेदारों की पहचान करना है जिन्होंने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और जाली दस्तावेजों के जरिए सरकारी काम हासिल किए हैं।









